सपा-आप की नजदीकियां उड़ा सकती हैं कांग्रेस की नींद...अखिलेश के एक बयान ने बदला यूपी चुनाव 2027 का गणित?

UP Politics: क्या यूपी में 2027 का नया समीकरण बन रहा है? सुल्तानपुर में अखिलेश यादव के साथ दिखे 'आप' नेता संजय सिंह, सपा सुप्रीमो ने गठबंधन के सवाल पर दिया यह जवाब।
Uttar Pradesh New Political Equation
उत्तर प्रदेश में नया राजनीतिक समीकरण (सोर्स- डिजाइन इमेज)
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Akhilesh Yadav Sultanpur Visit: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऊंट किस करवट बैठे इसका कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता है। दरअसल, राज्य में 2027 में चुनाव हैं और चुनाव से पहले नए समीकरण की सुगबुगाहट सामने आने लगी है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 13 अप्रैल को सुल्तानपुर पहुंचे। यहां पर उन्होंने साल 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर एक अहम संकेत दिया है।

खबरों के अनुसार अखिलेश यादव के साथ आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी थे। और जब अखिलेश से पूछा गया कि क्या सपा और आम आदमी पार्टी आने वाले चुनाव में साथ आ सकते हैं। तब इस सवाल का जवाब देते हुए सपा सुप्रीमो ने साफ कहा कि हम लोग मिलकर तय लेंगे कि क्या करना है।

कांग्रेस की बढ़ सकती है मुश्किल

दरअसल, अखिलेश यादव के इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। यहां तक की इस संकेत से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ना भी तय माना जा रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस, कई राज्यों में आम आदमी पार्टी से दूरी बना चुकी है, यहां तक की पिछले साल हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस और केजरीवाल की पार्टी इस तरह आमने-सामने थी कि राहुल गांधी ने खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था और उसी चुनाव में अखिलेश यादव ने केजरीवाल का खुला समर्थन किया था। ऐसे में अब अगर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी साथ आई और 2027 में सीट शेयरिंग पर बात भी बढ़ी तो यूपी में आगे की राह कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगी।

हमलोग बातचीत करते हैं तब हल निकलता है- सपा सुप्रीमो

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में एक तंत्र की कोई जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के संविधान से देश चले, मन विधान से नहीं चले। यहां लोग वन वे है, बोलते जाते हैं, आप सुनते जाइए वन वे की कोई जगह नहीं होती डेमोक्रेसी में डेमोक्रेसी में संवाद है, हम लोगों से बातचीत करते हैं तब हल निकलता है। हाल में ही बीजेपी उद्योगपतियों से साथ खड़ी दिखाई देती है।

सीएम योगी आदित्यनाथ से मांगा इस्तीफा

दरअसल, अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए नोएडा के जमदूर आंदोलन का मुद्दा उठाया और लिखा कि अगर माननीय मुख्यमंत्री जी नोएडा के मज़दूरों के आंदोलन को किसी की साज़िश बता रहे हैं तो एक सवाल जनता आपसे पूछ रही है कि अगर ये सच है तो आपकी ख़ुफ़िया पुलिस क्या आपके साथ बंगाल प्रचार करने गयी थी या वनस्पति की खोजबीन में लीन थी या उसके प्रभाव में। उन्होंने आगे लिखा कि अगर आप से प्रदेश नहीं संभल रहा है तो ससम्मान इस गद्दी से उतरकर जाइए, नहीं तो जनता उतार देगी।

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