कॉन्सेप्ट फोटो (AI जनरेटेड)
AIMIM vs Samajwadi Party: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का स्ट्राइक रेट पिछले एक साल में शानदार रहा है। जिसके चलते पार्टी के हौसले सातवें आसमान पर हैं। AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव और हालिया महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर आगे के रास्ते बनाने शुरू कर दिए हैं।
पिछले साल नवंबर में हुए बिहार चुनाव में AIMIM ने पांच विधानसभा सीटें जीतीं। यहां आंकड़ा बिहार की कई क्षेत्रीय पार्टियों से भी बेहतर। इसके बाद हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM ने हाल ही में महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में अपेक्षा से बेहतर नतीजे हासिल किए हैं।
ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र में 13 नगर निगमों के 125 वॉर्डों में जीत हासिल की है। यह आंकड़ा पिछले नगर निगम चुनावों में जीते गए 56 वॉर्डों की तुलना में कहीं अधिक है। खास बात यह है कि ओवैसी की पार्टी ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी 8 वार्डों में जीत हासिल करने में कामयाब रही है।
पार्टी प्रेसिडेंट ओवैसी एक के बाद एक राज्य में जीत से उत्साहित हैं। पार्टी उत्तर प्रदेश में आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने की भी प्लानिंग कर रही है। AIMIM ने इसका ऐलान कर दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बिहार और महाराष्ट्र के बाद क्या ओवैसी की पार्टी उत्तर प्रदेश में कमाल कर पाएगी…?
AIMIM ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया है। असदुद्दीन ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को चैलेंज किया। तेलंगाना के निज़ामाबाद में एक रैली में उन्होंने कहा, “मिस्टर योगी, तैयार हो जाइए, मैं UP आ रहा हूं। चलो UP चलते हैं और वहां अपना झंडा गाड़ते हैं।”
अकबरुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आते ही यूपी AIMIM अध्यक्ष शौकत अली ने आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने अपनी पार्टी की लाइन पर कायम रहते हुए एक विवादित बयान जारी किया। शौकत अली ने एक रैली में ‘हम दो, हमारे दो दर्जन’ का नारा लगाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
इन्फोग्राफिक (AI जनरेटेड)
मुरादाबाद में एक पब्लिक रैली के दौरान उन्होंने मुसलमानों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की और दावा किया कि इससे देश मजबूत होगा। रैली के दौरान शौकत अली ने दावा किया कि उनके आठ बच्चे हैं और उनके बड़े भाई के 16 बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि वह मुसलमानों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए बढ़ावा देंगे।
असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, मुस्लिम और दलित पॉलिटिक्स के लिए काम करती है। तेलंगाना और बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक उनकी पार्टी मुस्लिम-बहुल इलाकों में एक्टिव रूप से चुनाव लड़ती है। इसी वजह से उन्हें बिहार और महाराष्ट्र में सफलता मिली है।
AIMIM ने बिहार में बहुत अच्छा परफॉर्म किया। नतीजतन राष्ट्रीय जनता दल की लीडरशिप वाले महागठबंधन को नुकसान हुआ। AIMIM ने बिहार की 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए, जहां मुस्लिम आबादी 64% से ज्यादा है। इन 28 सीटों में से पार्टी ने 5 सीटें जीतीं।
यूपी में मुस्लिम समुदाय तकरीबन एकतरफा सपा को वोट करता है। राज्य विधानसभा में सपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। साल 2024 के आम चुनाव में PDA फार्मूले के तह 37 लोकसभा सीटें जीतीं और भाजपा को पीछे छोड़कर यूपी में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा और सीएम योगी आदित्यनाथ को कड़ी चुनौती देगी।
UGC नियमों के खिलाफ सवर्णों की नाराजगी के साथ रोजगार को लेकर युवाओं का आक्रोश भाजपा के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ऐसे में आने वाले चुनावों में सत्ता के लिए सपा और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है। लेकि अगर AIMIM यूपी में आकर विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारती है तो मुस्लिम वोट बंटने से सपा को नुकसान और भाजपा को फायदा हो सकता है।
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एक सच यह भी है कि AIMIM ने पिछला 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी ने 403 विधानसभा सीटों में से 95 पर उम्मीदवार खड़े किए थे। सभी सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई और एक भी उम्मीदवार नहीं जीता। जबकि AIMIM ने बिहार में पिछली बार भी पांच सीटें जीती थीं।
Ans: AIMIM ने बिहार और महाराष्ट्र में मुस्लिम-बहुल इलाकों पर फोकस किया और स्थानीय मुद्दों के साथ आक्रामक संगठन विस्तार किया। बिहार में 28 सीटों पर लड़कर 5 जीत और महाराष्ट्र में 125 नगर निकाय वार्डों में जीत ने पार्टी का स्ट्राइक रेट मजबूत किया, जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा है।
Ans: उत्तर प्रदेश में AIMIM के लिए राह आसान नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी। यूपी में मुस्लिम वोटर परंपरागत रूप से सपा के साथ जाता है, इसलिए AIMIM का प्रभाव सीमित रह सकता है, हालांकि वोट कटवा की भूमिका जरूर अहम हो सकती है।
Ans: अगर AIMIM यूपी में मजबूती से चुनाव लड़ती है, तो मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है। इससे समाजवादी पार्टी को नुकसान और भाजपा को अप्रत्यक्ष फायदा मिलने की संभावना है। यही वजह है कि AIMIM की एंट्री को यूपी की सियासत में ‘गेम-चेंजर’ से ज्यादा ‘वोट-डिवाइडर फैक्टर’ माना जा रहा है।