Agra: मलपुरा में भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह का भंडाफोड़, हरियाणा की टीम ने डिकॉय गर्भवती के जरिए खोला राज

Fetal Sex Determination Case: मलपुरा क्षेत्र में भ्रूण लिंग परीक्षण के अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सोनीपत PC-PNDT टीम ने डिकॉय कार्रवाई के दौरान संस्कार हॉस्पिटल पर छापा मारकर छह लोगों को पकड़ा।
Illegal Fetal Sex Determination Network Busted in Agra
पकड़े गए आरोपी(सोर्स- फोटो नवभारत)
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Agra Fetal Sex Determination Case: भ्रूण के लिंग की जांच पर सख्त कानूनी पाबंदी और लगातार चल रही कार्रवाई के बावजूद इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। आगरा के मलपुरा थाना क्षेत्र में एक बार फिर भ्रूण लिंग परीक्षण के अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सोनीपत, हरियाणा की PC-PNDT टीम ने डिकॉय गर्भवती महिला के जरिए कार्रवाई करते हुए इटौरा स्थित संस्कार हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान छह लोगों को पकड़ा गया और मौके से पोर्टेबल वायरलेस अल्ट्रासाउंड मशीन बरामद की गई।

जानकारी के मुताबिक सोनीपत की PC-PNDT टीम को भ्रूण लिंग परीक्षण के अवैध कारोबार की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने एक गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में तैयार किया और कथित गिरोह के संपर्क में पहुंचाया।

शिशु के लिंग की जांच के लिए 90 हजार रुपये में तय हुआ सौदा

रिपोर्ट के अनुसार गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच के लिए 90 हजार रुपये में सौदा तय हुआ, जिसमें 40 हजार रुपये एडवांस दिए गए थे। गिरोह के सदस्य डिकॉय महिला को अलग-अलग स्थानों पर घुमाते हुए आखिरकार मलपुरा क्षेत्र के इटौरा स्थित संस्कार हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। इसके बाद टीम ने अस्पताल में दबिश दी।

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छापेमारी के दौरान टीम को एक चीन निर्मित वायरलेस पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मिली। रिपोर्टों के मुताबिक यह मशीन मोबाइल फोन और टैबलेट से वाईफाई के माध्यम से कनेक्ट होकर संचालित की जा सकती थी। कार्रवाई में मशीन के साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जांच के दायरे में लिए गए हैं।

बिना पंजीकरण चल रहा था अस्पताल

स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार संस्कार हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर का संचालन सैंया निवासी भानु प्रताप कर रहा था और अस्पताल का पंजीकरण नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक भवन को करीब दो महीने पहले किराए पर लेकर अस्पताल संचालित किया जा रहा था। अस्पताल में आईसीयू सुविधा का बोर्ड भी लगा हुआ था।

कार्रवाई में भानु प्रताप के साथ ओम नारायण, मयंक शर्मा, जगवीर सिंह, मनीष कुशवाह और पवन कुशवाह को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। सोनीपत से जुड़े एक व्यक्ति शंकर राणा का नाम भी रिपोर्ट में आया है; गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और नामों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है, इसलिए अंतिम पुलिस अभिलेख से इसकी पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

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तकनीक बदलकर चल रहा था अवैध कारोबार

इस कार्रवाई ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि प्रतिबंध के बावजूद अत्याधुनिक और पोर्टेबल तकनीक का इस्तेमाल कर किस तरह लिंग परीक्षण के अवैध कारोबार को संचालित करने की कोशिश की जा रही है। छोटी वायरलेस अल्ट्रासाउंड मशीन को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है और मोबाइल या टैबलेट से कनेक्ट किया जा सकता है। ऐसे में केवल पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी के साथ-साथ पोर्टेबल मशीनों के अवैध इस्तेमाल पर भी नजर रखना चुनौती बन गया है।

आगरा में इससे पहले भी भ्रूण लिंग परीक्षण के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में सिकंदरा के बाईपुर इलाके में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह के छह सदस्य पकड़े गए थे।

मलपुरा की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रशासनिक सख्ती के बावजूद ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों में ऐसे अवैध नेटवर्क किस तरह सक्रिय हो रहे हैं। अब जांच का अहम हिस्सा यह होगा कि बरामद मशीन कहां से खरीदी गई, इसे संचालित कौन करता था और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक जांच एजेंसियां कैसे पहुंचती हैं।

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