स्वच्छ भारत मिशन में करोड़ों के खेल का आरोप: नगर निगम के टेंडर पर उठे सवाल, नगर आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
Agra Municipal Corporation: आगरा नगर निगम के स्वच्छ भारत मिशन टेंडर से जुड़ी इंदौर की निजी कंपनी 'म्यूज' पर भर्ती, वेतन भुगतान और कर्मचारियों की संख्या में कथित फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं।
- Reported By: प्रदीप कुमार रावत | Edited By: स्निग्धा श्रीवास्तव
शिकायतकर्ता ( सोर्स- फोटो नवभारत)
Agra Municipal Corporation Recruitment Fraud: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच आगरा नगर निगम में संचालित स्वच्छ भारत मिशन के एक टेंडर को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि वेस्ट मैनेजमेंट जागरूकता अभियान चला रही इंदौर की निजी कंपनी ‘म्यूज’ ने भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारियों के वेतन और उपस्थिति के रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की है। मामले के सामने आने के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया है और नगर आयुक्त संतोष वैश्य ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं।
तय वेतन का केवल करीब 50 प्रतिशत ही किया गया भुगतान
जानकारी के अनुसार नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत वेस्ट मैनेजमेंट जागरूकता अभियान के लिए उक्त कंपनी को टेंडर दिया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नियुक्ति के समय कर्मचारियों को 65 हजार, 75 हजार और फील्ड स्टाफ को 18 हजार रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया गया, लेकिन वास्तविकता में सभी कर्मचारियों को तय वेतन का केवल करीब 50 प्रतिशत ही भुगतान किया गया।
श्रम विभाग की नोटिस का जवाब देने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर बनाया दबाव
कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने पहले नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त और बाद में डिप्टी लेबर कमिश्नर से शिकायत की। शिकायत को गंभीर मानते हुए श्रम विभाग ने कंपनी को नोटिस जारी किया, लेकिन आरोप है कि कंपनी ने नोटिस का जवाब देने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
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शिकायतकर्ता एवं टीम इंचार्ज सपना टैगोर का आरोप है कि कर्मचारियों से शिकायत वापस लेने के लिए शपथ-पत्र (एफिडेविट) मांगा गया। ऐसा करने से इनकार करने पर इंचार्ज सहित करीब 12 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। इतना ही नहीं, शिकायत वापस न लेने पर मानहानि का नोटिस भेजकर डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है।
कागजों में 125 कर्मचारियों की तैनाती लेकिन केवल करीब 90 कर्मचारी ही कार्यरत
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि कंपनी ने कागजों में 125 कर्मचारियों की तैनाती दिखाई, जबकि मौके पर केवल करीब 90 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। आरोप यह भी है कि आधा दर्जन कर्मचारी एक साथ दूसरी फर्म में सिकंदराराऊ (हाथरस) में भी कार्य कर रहे हैं, जिससे रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले की जानकारी मिलने के बाद नगर आयुक्त संतोष वैश्य ने सहायक नगर आयुक्त से कंपनी के साथ हुए अनुबंध और पूरी प्रक्रिया की जानकारी तलब की। प्रारंभिक जानकारी से संतुष्ट न होने पर उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब यह जांच तय करेगी कि स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर हुए इस कथित खेल में कितनी सच्चाई है और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
