

Allahabad High Court Agra Farmers Schemes: किसानों के लिए संचालित उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका (पीआईएल) रिट संख्या 2302/2026 पर 28 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों से एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस ने अधिकारियों को भी तलब किया है।
जनहित याचिका किसान श्याम सिंह चाहर की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक तिवारी और केवी सिंह ने पक्ष रखा।
याचिका में किसानों के लिए संचालित प्रधानमंत्री सिंचाई योजना समेत उद्यान विभाग की कई योजनाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि वर्ष 2018 से 31 मार्च 2026 के बीच किसानों के खेतों में बोरिंग, पाइप लाइन और ड्रिप इरिगेशन सिस्टम उपलब्ध कराने की योजनाओं में कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों और फर्म संचालकों की मिलीभगत से कथित गड़बड़ी की गई। याचिका में दावा किया गया है कि 500 से अधिक किसान इससे प्रभावित हुए हैं। कुछ स्थानों पर काम नहीं होने के बावजूद कागजों में कार्य पूर्ण दिखाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
याचिका में विभागीय स्तर पर हुई जांच को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच टीमों ने मौके की वास्तविक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट लगाकर कथित तौर पर मामलों को सही दिखा दिया। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
आगरा में किसानों की फसल को बारिश, गर्मी, आंधी-तूफान और सर्दी से बचाने के लिए संचालित पैक हाउस योजना को लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि किसानों के खेतों में करीब 30x30 आकार के पैक हाउस/भंडारण स्थल बनाने के लिए सरकार की ओर से अनुदान दिया गया, लेकिन कुछ मामलों में निर्माण हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया और कागजों में कार्य पूर्ण दिखा दिया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि ऐसे मामलों में जांच करने वाले अधिकारियों ने भी निर्माण कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट लगा दी।
इसी तरह बागवानी योजनाओं में भी मौके पर काम नहीं होने के बावजूद अभिलेखों में कार्य पूर्ण दिखाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। किसानों के आलू बीज पंजीकरण और वितरण से जुड़ी प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताओं का आरोप है।
याचिका के मुताबिक, सैकड़ों किसानों से आलू बीज वितरण के समय करीब 5 हजार से 8 हजार रुपये तक की राशि जमा कराई गई, लेकिन कई किसानों को अब तक उसका लाभांश नहीं मिला। किसानों द्वारा विभाग से खरीदे गए आलू बीज की धनराशि भी कई मामलों में वापस नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
किसानों से जुड़ी इन योजनाओं में कथित अनियमितताओं के मामले को नव भारत ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आने के बाद मामला लगातार चर्चा में रहा और अब जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पूरे प्रकरण में अधिकारियों की जवाबदेही का सवाल और गंभीर हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में उद्यान विभाग के उच्च अधिकारी और शासन स्तर पर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की संभावना है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई जांच और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर ही तय होगी।
याचिकाकर्ता श्याम सिंह चाहर ने नव भारत से विशेष बातचीत में कहा कि अभी इस प्रकरण में अधिकारियों पर गाज गिरना बाकी है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं और उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर किया गया धोखा और भ्रष्टाचार गंभीर मामला है। उन्हें उम्मीद है कि हाईकोर्ट की कार्रवाई के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होगी।
वहीं, इस पूरे मामले में मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार मंडलायुक्त स्तर से भी मामले में कार्रवाई की जा सकती है। अब निगाहें हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले अधिकारियों के एफिडेविट और शासन स्तर से होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
मामले ने किसानों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं की जमीनी निगरानी पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि बिना निर्माण के भुगतान, कागजों में कार्य पूर्ण दिखाने और किसानों को लाभ नहीं मिलने के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक योजना की अनियमितता नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा।