काशी में बनेगा शिंजो आबे की स्मृतियों का स्थायी केंद्र, रुद्राक्ष में ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण

Shinzo Abe Varanasi: वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण होगा। यह भारत-जापान मैत्री और काशी-क्योटो संबंधों की विरासत को दर्शाएगा।
Shinzo Abe Memorial Corridor in Varanasi: India-Japan Friendship to Get a Permanent Symbol
शिंजो आबे की स्मृतियां(सोर्स- नवभारत लाइव)
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Shinzo Abe Memorial Varanasi: काशी में भारत-जापान की दोस्ती को एक और स्थायी पहचान मिलने जा रही है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का बुधवार को वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में लोकार्पण होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होने वाला यह कार्यक्रम भारत और जापान के बीच मजबूत होते रिश्तों के साथ ही काशी और जापान के प्राचीन शहर क्योटो की सांस्कृतिक मित्रता को भी रेखांकित करेगा।

रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तैयार किया गया यह स्मृति गलियारा केवल शिंजो आबे की यादों को संजोने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक, कूटनीतिक और विकासात्मक संबंधों के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। काशी और क्योटो के बीच सांस्कृतिक समानताओं तथा दोनों देशों की साझा विरासत ने भारत-जापान संबंधों को एक अलग आयाम दिया है।

शिंजो आबे की स्मृतियां
शिंजो आबे की स्मृतियां(सोर्स- नवभारत लाइव)
Shinzo Abe Memorial Corridor in Varanasi: India-Japan Friendship to Get a Permanent Symbol
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रुद्राक्ष से जुड़ी है शिंजो आबे की स्मृति

रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर स्वयं भारत-जापान मैत्री का महत्वपूर्ण प्रतीक है। जापान के सहयोग से निर्मित इस सेंटर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2021 को किया था। रुद्राक्ष की परिकल्पना और इसके निर्माण की कहानी में भी जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

दिसंबर 2015 में शिंजो आबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी पहुंचे थे। इस दौरान दोनों नेताओं ने काशी के घाटों पर समय बिताया और गंगा आरती में भी शामिल हुए। इसी यात्रा के दौरान काशी और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा रुद्राक्ष जैसे भारत-जापान सहयोग के प्रोजेक्ट को लेकर भी चर्चा हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में रुद्राक्ष के उद्घाटन के दौरान शिंजो आबे के साथ हुई बातचीत और इस परियोजना से जुड़े उनके सहयोग को याद किया था। ऐसे में अब उसी परिसर में आबे के नाम पर स्मृति गलियारे का निर्माण दोनों नेताओं के बीच रहे व्यक्तिगत संबंधों और भारत-जापान की मित्रता की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

दोस्ती की यादों को मिलेगी स्थायी पहचान

शिंजो आबे का जुलाई 2022 में निधन हो गया था। इसके बावजूद भारत-जापान संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मित्रता को दोनों देशों में लंबे समय से याद किया जाता रहा है। काशी में उनके नाम पर तैयार किया गया यह कॉरिडोर उसी स्मृति को स्थायी स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रुद्राक्ष परिसर में शिंजो आबे की स्मृतियों को स्थान मिलना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वही परिसर है जो भारत-जापान सहयोग और दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत की विरासत से जुड़ा है। काशी में आबे की यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी तस्वीरें तथा दोनों देशों के बीच मैत्री की झलकियां इस स्मृति गलियारे को विशेष महत्व देती हैं।

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काशी-क्योटो की दोस्ती को मिलेगा नया आयाम

भारत और जापान के बीच संबंधों में काशी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। काशी और क्योटो दोनों ही अपने-अपने देशों की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रमुख केंद्र हैं। दोनों शहरों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भारत-जापान संबंधों का अहम आधार माना जाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भारत-जापान संबंधों को दो प्राचीन संस्कृतियों के बीच विश्वास और सहयोग का सेतु बताते रहे हैं। उनके अनुसार काशी से क्योटो तक की यह मैत्री अब संस्कृति और आध्यात्मिकता से आगे बढ़कर आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी का भी आधार बन रही है। उत्तर प्रदेश में जापानी कंपनियों के साथ करीब 90 हजार करोड़ रुपये के समझौते होने की बात भी मुख्यमंत्री की ओर से कही गई है।

अतीत की याद और भविष्य की साझेदारी का संदेश

आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण ऐसे समय हो रहा है जब भारत और जापान के संबंध रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्तर पर लगातार विस्तार पा रहे हैं। ऐसे में यह स्मृति गलियारा अतीत की साझा यादों के साथ भविष्य की साझेदारी का संदेश भी देगा।

काशी में शिंजो आबे की स्मृतियों को स्थायी स्थान मिलना भारत-जापान मैत्री की उस यात्रा की याद दिलाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की व्यक्तिगत मित्रता ने भी अहम भूमिका निभाई। रुद्राक्ष परिसर अब दोनों देशों के इस संबंध की कहानी को सहेजने वाले एक नए स्मृति स्थल के रूप में सामने आएगा।

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