साइबर ठगी अब सिर्फ अपराध नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा; नेटवर्क के सरगनाओं पर हो प्रहार: अभिषेक कपूर

Agra Cyber ​​Fraud: अभिषेक कपूर ने कहा कि आगरा पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और कई मामलों का खुलासा भी हुआ है। पुलिस को अब कार्रवाई का दायरा और व्यापक करने की जरूरत है।
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साइबर ठगी(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • डिजिटल वित्तीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

  • आगरा पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ सतर्क

  • कार्रवाई का दायरा और व्यापक करने की जरूरत

Agra Cyber Crimes Rise: साइबर ठगी अब केवल किसी व्यक्ति के बैंक खाते से रकम उड़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। यह संगठित अपराध का ऐसा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बनती जा रही है, जिसकी पहुंच बैंकिंग सिस्टम, सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्यक्तिगत डेटा और क्रिप्टोकरेंसी तक हो चुकी है। दुनिया के अलग-अलग देशों में सामने आ रहे साइबर हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ठगी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

सामाजिक एवं राजनीतिक विश्लेषक अभिषेक कपूर ने "नव भारत" से विशेष बातचीत में बताया कि बढ़ते साइबर अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों के तौर-तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। अब अपराधी केवल तकनीकी खामियों का फायदा नहीं उठाते, बल्कि फर्जी बैंक खातों, म्यूल अकाउंट, नकली सिम कार्ड, डिजिटल पहचान और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग माध्यमों से खपाने का संगठित तंत्र तैयार कर रहे हैं। यह स्थिति आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए चुनौती है।

दुनियाभर में सामने आए साइबर अपराध के मामले इस खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं। दक्षिण कोरिया में हजारों लोगों का डेटा उजागर होने, लैटिन अमेरिका में सैकड़ों संस्थानों को निशाना बनाए जाने और इटली में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के मामले चर्चा में रहे हैं। भारत में भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से भारी नुकसान के दावे सामने आए हैं। वहीं, सितंबर 2026 में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Bitget के हॉट वॉलेट से लगभग 351.6 मिलियन डॉलर के अनधिकृत ट्रांसफर की खबर ने डिजिटल वित्तीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, विभिन्न देशों से जुड़े इन आंकड़ों और घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

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गिरफ्तारी से आगे बढ़कर खत्म करना होगा ठगी का पूरा सिस्टम

अभिषेक कपूर ने कहा कि आगरा पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और कई मामलों का खुलासा भी हुआ है। पुलिस के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन अब कार्रवाई का दायरा और व्यापक करने की जरूरत है। किसी एक साइबर अपराधी की गिरफ्तारी से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि ठगी की रकम किन बैंक खातों में पहुंची, उसे किसने निकाला, किन लोगों ने आगे ट्रांसफर किया और इसके पीछे वास्तविक मास्टरमाइंड कौन हैं।

उन्होंने कहा कि फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, म्यूल अकाउंट संचालित करने वाले, फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराने वाले और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर निकालने वाले लोग इस अपराध तंत्र की अहम कड़ियां हैं। इन सभी की पहचान कर पूरे नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। ठगी की रकम कहां से आई और कहां पहुंची, इसकी डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी अनिवार्य होनी चाहिए।

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अभिषेक कपूर(सोर्स: नवभारत लाइव)

बैंक, टेलीकॉम कंपनियों और पुलिस के बीच मजबूत हो समन्वय

अभिषेक कपूर ने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिले में विशेष साइबर अपराध टीम को मजबूत किया जाए। बैंकिंग संस्थानों, दूरसंचार कंपनियों और साइबर विशेषज्ञों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर संदिग्ध खातों और लेनदेन की तत्काल निगरानी की व्यवस्था हो। साइबर ठगी से अर्जित धन और अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर कानूनी कार्रवाई को भी प्राथमिकता दी जाए।

डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

अभिषेक कपूर ने नागरिकों से अपील की कि किसी के साथ ओटीपी, बैंक पासवर्ड, एटीएम संबंधी जानकारी या निजी दस्तावेज साझा न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने और संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने से बचें। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर पैसे मांगने वालों के झांसे में न आएं। साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और cybercrime.gov.in पर भी सूचना दें।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें बैंकिंग व्यवस्था, तकनीकी संस्थानों और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। साइबर अपराधियों को पकड़ने के साथ उनके आर्थिक स्रोत, फर्जी खातों और सहयोगियों के पूरे तंत्र को खत्म करना होगा। साइबर ठगी की जड़ पर प्रहार होगा, तभी डिजिटल भारत में आम आदमी का भरोसा और उसकी जमा पूंजी सुरक्षित रह सकेगी।

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