सांकेतिक तस्वीर
Indian Railways No Waiting Policy: रेल यात्रियों के लिए ट्रेन में सीट आवंटन प्रक्रिया में जल्द ही एक बड़ा बदलाव आने वाला है। वर्तमान में अगर कोई यात्री अपने निर्धारित बोर्डिंग स्टेशन पर नहीं पहुंचता, तो ट्रैफिक टिकट एनफोर्समेंट (TTE) उसे अगले स्टेशन तक का इंतजार करते हैं। अगर अगले स्टेशन पर भी यात्री नहीं आता, तो सीट को प्रतीक्षा सूची (Waiting List) या आरएसी (RAC) यात्रियों को आवंटित किया जाता है। लेकिन अब इस व्यवस्था में तेजी से बदलाव किया जा रहा है और रेल मंत्रालय ने इसके लिए सिस्टम में सॉफ्टवेयर अपडेट करने के निर्देश दे दिए हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद टीटीई यात्रियों के बोर्डिंग न करने की स्थिति में अगले स्टेशन तक इंतजार नहीं करेंगे। वे ट्रेन में चेकिंग के दौरान ही अपने ईएफटी (ई-फॉर्म) में उस सीट पर “नॉट टर्न अप” (Not Turn Up) दर्ज कर देंगे। जैसे ही किसी सीट की खाली होने की सूचना दर्ज हो जाएगी, वह सीट तुरंत वेटिंग या आरएसी टिकट धारकों में से किसी एक को आवंटित कर दी जाएगी। सीट आवंटित होने की सूचना सीधे यात्री के मोबाइल पर भेजी जाएगी।
इस बदलाव का उद्देश्य यह है कि ट्रेन में सीटों का उपयोग अधिकतम हो और खाली सीटों का प्रबंधन प्रभावी तरीके से हो सके। वर्तमान में सीट खाली होने के बावजूद अगले स्टेशन तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे सीट कई घंटों तक खाली रह सकती है और कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नई प्रणाली से यह प्रक्रिया बहुत तेजी से होगी और यात्रियों को तुरंत सीट मिल जाएगी।
पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व मुख्य परिचालन प्रबंधक राकेश त्रिपाठी का कहना है कि यह तकनीकी बदलाव भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और ट्रेन के अंदर सीटों का उपयोग भी बेहतर तरीके से होगा।
जानकारी के अनुसार लगभग तीन से पांच फीसदी सीटें ऐसे यात्रियों के कारण खाली रह जाती हैं जो यात्रा रद्द कर देते हैं या अपने बोर्डिंग स्टेशन पर नहीं पहुंचते। ऐसे में यदि ट्रेन में आरएसी या वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को तुरंत सीट मिल जाए, तो उन्हें भी सुविधा होगी और रेलवे की सीटों का उपयोग भी बेहतर होगा।
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इसके अलावा यह भी कहा गया है कि यात्रियों को अपनी बोर्डिंग स्टेशन में बदलाव की सुविधा चार्ट बनने के 24 घंटे पहले तक ही मिलती है, उसके बाद न तो बोर्डिंग बदली जा सकती है और न ही किसी अन्य स्टेशन से सवार होने की अनुमति मिलती है। इस नई व्यवस्था से यात्रियों को सीट मिलने में समय की बचत होगी और रेलवे की सेवा और संचालन में सुधार संभव होगा।