रेलवे का नया नियम: टीटीई अब नहीं करेगा इंतजार, बोर्डिंग स्टेशन पर न पहुंचे तो टिकट कैंसिल
Indian Railways New Rules: भारतीय रेलवे ने अब नया नियम लागू कर दिया है। रेलवे ने टिकटिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब यात्रियों को बड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
- Written By: प्रिया जैस
भारतीय रेलवे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Ticket Cancellation Rule: रेलवे ने यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और सीटों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए टिकटिंग व्यवस्था में एक अहम बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को बोर्डिंग स्टेशन से 15 मिनट के भीतर अपनी आवंटित सीट पर पहुंचना अनिवार्य होगा। तय समय में सीट पर नहीं पहुंचने की स्थिति में संबंधित यात्री का टिकट स्वतः रद्द कर दिया जाएगा।
रेलवे ने इसके लिए टीटीई (टिकट जांच कर्मचारी) को दिए जाने वाले एचएचटी (हैंड हेल्ड टर्मिनल) डिवाइस को अपडेट किया है। इस तकनीकी अपडेट के बाद अब टीटीई को रियल टाइम में यह जानकारी मिलेगी कि कौनसा यात्री बोर्डिंग स्टेशन से चढ़कर अपनी सीट पर पहुंचा है और कौन नहीं। यदि कोई आरक्षित यात्री निर्धारित समय सीमा में अपनी सीट पर नहीं पहुंचता तो उसका आरक्षण रद्द कर दिया जाएगा।
दर्ज होगा नोट प्रेजेंट
नई व्यवस्था के अनुसार टिकट रद्द होते ही वह सीट आरएसी या वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित कर दी जाएगी। जैसे ही सीट खाली पाई जाती है टीटीई एचएचटी के माध्यम से तुरंत ‘नोट प्रेजेंट’ दर्ज करेगा जिसके बाद सिस्टम स्वतः अगली प्राथमिकता वाले यात्री को सीट अलॉट कर देगा।
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इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी आरएसी या वेटिंग टिकट धारक यात्रियों को एसएमएस के माध्यम से भी दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य यात्रा के दौरान खाली सीटों की समस्या को खत्म करना है। अक्सर देखा गया है कि कई यात्री बोर्डिंग स्टेशन बदल लेते हैं या यात्रा ही नहीं करते लेकिन उनकी सीटें काफी दूरी तक खाली रहती हैं। इससे आरएसी और वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को परेशानी होती थी। नई प्रणाली से ऐसी स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।
करना पड़ता था 2 स्टेशनों तक इंतजार
पहले की व्यवस्था में टीटीई को बोर्डिंग स्टेशन के बाद अगले 1 या 2 स्टेशनों तक इंतजार करना पड़ता था। इसके चलते सीटों का त्वरित उपयोग नहीं हो पाता था और पूरी प्रक्रिया मैनुअल होने के कारण पारदर्शिता पर भी सवाल उठते थे। अब डिजिटल सिस्टम के जरिए तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा जिससे यात्रा अधिक सुव्यवस्थित होगी।
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रेलवे का मानना है कि यह बदलाव यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक, न्यायसंगत और पारदर्शी साबित होगा। आरक्षित टिकट लेकर यात्रा न करने की प्रवृत्ति पर भी इससे अंकुश लगेगा। साथ ही वेटिंग और आरएसी यात्रियों को यात्रा के दौरान सीट मिलने की संभावना बढ़ेगी। कुल मिलाकर रेलवे की यह नई पहल आधुनिक तकनीक के माध्यम से सीट प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम मानी जा रही है जिससे आम यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
