दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: आशा वर्करों का मानदेय हुआ दोगुना, अब 3000 की जगह मिलेंगे 6000 रुपये

ASHA Workers Salary: दिल्ली सरकार ने आशा वर्करों के मासिक भत्ते को 3000 से बढ़ाकर 6000 रुपये कर दिया है। सीएम रेखा गुप्ता के इस निर्णय से 6725 आशा वर्करों को दोगुनी राशि का बड़ा लाभ मिलेगा।
Delhi ASHA Workers Salary
रेखा गुप्ता और आशा वर्कर्स(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Delhi ASHA Workers Salary: दिल्ली सरकार ने राजधानी दिल्ली में कार्यरत आशा वर्करों के आर्थिक कल्याण के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में आशा वर्करों के मासिक प्रोत्साहन भत्ते को सीधे दोगुना कर दिया गया है।

इस फैसले के तहत अब दिल्ली में काम कर रही आशा वर्करों को हर महीने 3000 रुपये के स्थान पर 6000 रुपये का मानदेय भत्ता मिलेगा। सरकार के इस कल्याणकारी कदम से दिल्ली में सेवाएं दे रही 6725 आशा वर्करों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और उनका मनोबल काफी बढ़ेगा।

कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में आशा वर्करों के मासिक प्रोत्साहन भत्ते में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत अब उन्हें हर महीने 6000 रुपये मिलेंगे।

इससे पहले आशा वर्करों को 3000 रुपये का मासिक प्रोत्साहन भत्ता दिया जाता था। नई व्यवस्था के तहत यह राशि सीधे दोगुनी हो गई है। यह बढ़ोतरी दिल्ली में वर्तमान में सेवाएं दे रही सभी 6725 आशा वर्करों पर लागू होगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आशा वर्करों को विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत मिलने वाले अन्य प्रोत्साहन भत्ते पहले की तरह जारी रहेंगे। यानी मासिक भत्ते में बढ़ोतरी के अलावा उनकी मौजूदा प्रोत्साहन राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी हैं ASHA Workers

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आशा वर्करों को दिल्ली की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। आशा वर्कर आम लोगों और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच संपर्क स्थापित करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

दिल्ली में सामान्य तौर पर एक आशा वर्कर करीब 2000 लोगों या लगभग 400 परिवारों की प्राथमिक स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़ी होती है। वे नियमित रूप से घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी देती हैं।

इसके साथ ही आशा वर्कर बच्चों के समय पर टीकाकरण को लेकर परिवारों को जागरूक करती हैं और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद करती हैं।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य और जागरूकता में अहम योगदान

आशा वर्कर गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक करने के साथ-साथ नई माताओं और नवजात बच्चों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं में भी सहयोग करती हैं।

वे स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस, सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य सर्वे और स्थानीय स्तर पर आयोजित बैठकों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। उनके काम का एक बड़ा हिस्सा लोगों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना और जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी देना है।

कोविड महामारी के दौरान भी किया काम

कोविड-19 महामारी के दौरान आशा वर्करों ने घर-घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं और जागरूकता अभियान में योगदान दिया था। कठिन परिस्थितियों में उनकी भूमिका को स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

आशा वर्करों की जिम्मेदारियों और लंबे समय से की जा रही भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है। मासिक प्रोत्साहन राशि बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति को अतिरिक्त सहायता मिलने की उम्मीद है।

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महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

दिल्ली सरकार के अनुसार, आशा वर्करों के भत्ते में बढ़ोतरी उनके योगदान को मान्यता देने के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

सरकार का कहना है कि आर्थिक सहायता बढ़ने से आशा वर्करों को अपने काम के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली में 6725 आशा वर्करों को मिलने वाला यह बढ़ा हुआ मासिक भत्ता महिला कार्यबल के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

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