

Severe Iran Prison Abuse: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जेलों में बंद महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों पर दुख व्यक्त किया है। उनका दावा है कि पूछताछ के दौरान युवतियों के साथ अमानवीय शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है। हालांकि ईरान ने ट्रंप के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इस खुलासे के बाद दोनों देशों के बीच तनाव संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी प्रशासन लगातार मानवाधिकारों के गंभीर मुद्दे पर ईरान सरकार के ऊपर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का भारी दबाव बना रहा है।
ट्रंप ने दावा किया है कि महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का नियंत्रण है। आर्थिक संकट में फंसा ईरान समझौता करने के लिए बेताब है, लेकिन उसकी शर्तें अमेरिका को मंजूर नहीं हैं। ईरान समझौता करना चाहता है पर वह अभी तैयार नहीं है।
ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और वित्तीय रूप से बदहाल हो चुका है। वह अपने पुलिस और सैन्य कर्मियों को वेतन देने में भी पूरी तरह से असमर्थ है। इसके अलावा वर्तमान में ईरान के पास मजबूत नौसेना और वायुसेना भी नहीं है।
ईरान में महंगाई की दर 350% तक पहुंच चुकी है, जिससे आम जनता संघर्ष कर रही है। लोग दैनिक जरूरत की सामान्य चीजों के लिए भी भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाने को बड़ी आर्थिक क्रांति बताया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि परमाणु संपन्न ईरान इजरायल और पड़ोसी देशों के लिए बड़ा खतरा होगा, इसलिए अमेरिकी प्रशासन उन्हें कभी भी परमाणु हथियारों तक पहुंचने नहीं देगा।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस आर्थिक अभियान को असफल बताया है। उन्होंने कहा कि 14 साल पहले के प्रतिबंध और 8 साल पहले का अधिकतम दबाव विफल रहे और इसी तरह 5 महीने पहले का अमेरिकी समर्पण अभियान भी पूरी तरह नाकाम रहा।
अराघची ने कहा कि अमेरिका का यह नया आर्थिक अभियान भी पहले की तरह विफल होगा। उन्होंने ट्रंप की रणनीति को पुराना और घिसा-पिटा धमकाने वाला तरीका करार दिया और साफ किया कि ईरान किसी भी तरह की धमकियों के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगा।