बदल रहा है जमीन रजिस्ट्री का पूरा सिस्टम! जानिए क्या है 'भू-आधार' और कैसे मिलेगी अलग पहचान

Bhu Aadhaar ULPIN Scheme: केंद्र सरकार ने भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया हेतु 14 अंकों का यह डिजिटल पहचान नंबर लागू किया है, जिससे जमीन फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगेगी और रिकॉर्ड सुरक्षित होंगे।
Land Record Bhu Aadhaar ULPIN
भू-आधार (सोर्स - AI)
Published on: 
Updated on: 

Land Record Bhu Aadhaar ULPIN: केंद्र सरकार ने देश में जमीन की रजिस्ट्री और भू-अभिलेखों को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब हर जमीन और प्लॉट को 14 अंकों का यूनिक पहचान नंबर दिया जा रहा है। इसे भू-आधार या ULPIN के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। यह व्यवस्था जमीन की पहचान, नक्शे और रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने में मदद करेगी।

DILRMP 3.0 के तहत शुरू हुआ नया सिस्टम

केंद्र सरकार ने जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को आधुनिक और डिजिटल बनाने के लिए डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम 3.0 यानी DILRMP 3.0 की शुरुआत की है। सितंबर 2026 में जारी ऑफिशियल दिशा-निर्देशों के तहत इसके राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन की फॉर्मल शुरुआत की गई है।

सरकार ने वर्ष 2026 से 2031 तक पांच साल की अवधि के लिए इस प्रोग्राम का खाका तैयार किया है। इसे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फेज-वाइज तरीके से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड को ज्यादा व्यवस्थित, सिक्योर और ट्रांसपेरेंट बनाना है।

14 अंकों का ULPIN क्या है?

भू-आधार ULPIN के तहत देश के प्रत्येक भूखंड और प्लॉट को 14 अंकों की स्पेसिफिक आइडेंटिटी संख्या दी जाएगी। यह नंबर जमीन के डिजिटल आइडेंटिटी कार्ड की तरह काम करेगा। इसके जरिए संबंधित जमीन की सटीक पहचान और ज्योग्राफिकल लोकेशन दर्ज की जाएगी।

इस व्यवस्था में GIS यानी जियोग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे जमीन के नक्शे, उसकी पहचान, ओनरशिप और रजिस्ट्री से जुड़ी जानकारी को इंटीग्रेटेड डिजिटल सिस्टम में जोड़ा जा सकेगा। इससे जमीन से संबंधित जानकारी को ट्रैक करना आसान होगा।

जमीन के फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

भू-आधार सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े को रोकने में हो सकता है। डिजिटल आइडेंटिटी मिलने के बाद एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों को बेचने जैसी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

फर्जी डॉक्यूमेंट्स और जाली रजिस्ट्री के जरिए जमीन पर कब्जा करने की घटनाओं को भी रोकने में यह डिजिटल व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। जमीन के रिकॉर्ड सिक्योर और इंटीग्रेटेड होने से मालिकाना हक से जुड़ी जानकारी को बेहतर तरीके से प्रोटेक्ट किया जा सकेगा।

रेवेन्यू कोर्ट्स के रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटल

इस स्कीम के तहत गांवों और शहरों की प्रॉपर्टीज से जुड़े डेटा को सेंट्रल डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। पुरानी जमीनों और प्रॉपर्टीज के रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स को स्कैन कर डिजिटल रिकॉर्ड में सिक्योर किया जाएगा।

इसके अलावा राज्यों में रेवेन्यू कोर्ट्स के रिकॉर्ड को भी मेन लैंड रिकॉर्ड सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे जमीन से जुड़े मामलों और डिस्प्यूट्स की जानकारी एक ही डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध हो सकेगी। इससे लंबे समय से पेंडिंग भूमि विवादों के निपटारे की प्रोसेस को भी आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

Land Record Bhu Aadhaar ULPIN
दिवाली-छठ पर घर जाने वालों को रेलवे का बड़ा तोहफा, 4 नई स्पेशल ट्रेनों का ऐलान, चेक करें रूट, नंबर और टाइमिंग

जमीन की खरीद-बिक्री होगी आसान

DILRMP 3.0 के तहत डिजिटल लैंड रिकॉर्ड सिस्टम के मॉडर्न होने से भविष्य में जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री की प्रोसेस अधिक ट्रांसपेरेंट और व्यवस्थित हो सकती है।

सिटीजन्स को जमीन से जुड़ी जानकारी के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। भू-आधार ULPIN के जरिए जमीन की डिजिटल आइडेंटिटी तैयार होने से देश में सिक्योर और ट्रांसपेरेंट लैंड रिकॉर्ड सिस्टम डेवलप करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है।