

मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग का आधार पाताल में है इस वजह से इसे पातालेश्वर महादेव मंदिर कहा जाता है। कहा जाता है कि इसकी गहराई को नापने के लिए कई बार इसे उखाड़ने की कोशिश भी की गई है लेकिन इसे कोई हिला नहीं सका है। इस मंदिर में सदियों से दूध के साथ भगवान शिव को झाड़ू चढ़ाने की परंपरा है। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना साल 1902 हुई थी। इस मंदिर में साल में दो बार मेला भी आयोजित होता है।
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