नाथद्वारा का श्रीनाथ जी मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
Nathdwara Temple: राजस्थान किलों और विरासत के रूप में दुनियाभर में प्रख्यात है जहां पर कई धार्मिक स्थल हैं। यहां पर अरावली की गोद में बनास नदी के किनारे बसा एक मंदिर बहुत ही खास तीर्थ स्थल है। इस मंदिर भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी और उनका परिवार अक्सर हाजिरी लगाने आते हैं। इस मंदिर का नाम नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर है जहां पर भगवान कृष्ण सात वर्षीय शिशु अवतार में विराजमान हैं। यह एक पवित्र और प्रसिद्ध वैष्णव तीर्थस्थल है। इस में कई बड़ी से बड़ी हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं। आइए, जानते हैं इस मंदिर में ऐसा क्या खास है कि अमीर से अमीर व्यक्ति भी यहां दर्शन के लिए आते हैं।
जानकारी के अनुसार मुगल शासक औरंगजेब मूर्तिपूजा के विरोधी थे और उन्होंने अपने शासनकाल में कई मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया। जिसमें मथुरा जिले में स्थित श्रीनाथ जी मंदिर भी शामिल था। श्रीनाथ जी की मूर्ति को क्षति न पहुंचे इस लिए मंदिर के पुजारी दामोदर दास बैरागी मूर्ति को मंदिर से बाहर निकाल कर लाए। बता दें कि दामोदर दास वल्लभ संप्रदाय के थे और उन्होंने बैलगाड़ी में श्रीनाथ जी की मूर्ति को रखा। जिसके बाद कई राजाओं से आग्रह किया गया कि श्रीनाथ जी का मंदिर बनाकर उसमें मंदिर की स्थापना कराई जाए। लेकिन औरंगजेब के डर से किसी ने उनका प्रस्ताव नहीं स्वीकार्य किया।
इसके बाद दामोदर दास बैरागी ने मेवाड़ के राजा राणा राजसिंह के पास यह संदेश भिजवाया क्योंकि राणा राज सिहं पहले भी औरंगजेब को चुनौती दे चुके थे। यह दूसरा मौका था जब राणा राज सिंह ने औरंगजेब को चुनौती दी कि उनके रहते हुए बैलगाड़ी में रखी श्रीनाथजी की मूर्ति को कोई भी हाथ तक नहीं लगा सकता।
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बता दें कि उस समय श्रीनाथजी की मूर्ति बैलगाड़ी में जोधपुर के पास चौपासनी गांव में थी और यहां पर कई महीनों तक बैलगाड़ी में ही भगवान की उपासना होती रही। यह चौपासनी गांव जोधपुर का हिस्सा है और यहां पर बैलगाड़ी में रखी श्रीनाथजी की मूर्ति की जगह आज मंदिर बनाया जा चुका है। कोट से करीब 10 किमी दूर श्रीनाथ की चरण पादुकाएं उसी समय से आज भी वहीं रखी हुई हैं और उस जगह को आज चरण चौकी के नाम से जाना जाता है। आज हम जिसे नाथद्वारा के नाम से जानते हैं उस मंदिर का निर्माण फरवरी 1672 में हुई था और वहां श्रीनाथजी की मूर्ति की स्थापना की गई।
इस मंदिर में पहुंचने के लिए राजस्थान के उदयपुर हवाई अड्डे महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पहुंचना होगा। जो नाथद्वारा से करीब 56 किमी दूर है। यहां से आप बस या टैक्सी के माध्यम से नाथद्वारा पहुंच सकते हैं। इस मंदिर को लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। माना जाता है कि जब भगवान कृष्ण सात साल के थे तब से वह यहां विराजमान हो गए। इस मंदिर में भगवान की काले रंग की मूर्ति है जिसे पत्थर से तराशा गया है। कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान भक्तों को चावल के दानों में दर्शन देते हैं। इस वजह से भक्त यहां पर अपने साथ चावल लेकर जाते हैं और दर्शन के बाद इसे अपनी तिजोरी में रखते हैं। माना जाता है कि इस वजह से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।