राजस्थान में 1 जून से नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल, सरकार और पंप मालिकों में छिड़ी जंग? जानिए क्या है वजह
Rajasthan Petrol Pump: इधर राज्य सरकार के खाद्य विभाग की ओर से 13 मई से 18 मई तक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान राजस्थान के अलग-अलग जिलों में 226 पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया गया।
- Written By: मनोज आर्या
कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Rajasthan Petrol Pump On Strike From 1st June: राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में एक जून से पेट्रोल पंपों पर असर देखने मिल सकता है। राज्य के पेट्रोल पंप संचालकों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। पंप मालिकों का आरोप है कि सरकारी तेल कंपनियां उन पर अलग-अलग तरह की शर्तें थोप रही हैं, जिससे कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उनका कहना है कि कंपनियां पेट्रोल और डीजल बेचने की लिमिट तय कर रही हैं और ब्रांडेड फ्यूल बेचने के लिए दबाव बना रही हैं। जबकि, ज्यादातर ग्राहक सामान्य पेट्रोल और डीजल ही खरीदना चाहते हैं।
पेट्रोल पंप संचालकों का आरोप है कि अगर कंपनियों की शर्तें नहीं मानी जातीं तो पेट्रोल पंपों को नियमित सप्लाई नहीं दी जाती। दूसरी ओर हाल ही में खाद्य विभाग की जांच में भी कई पेट्रोल पंपों पर गड़बड़ियां मिली हैं, जिससे यह मामला और चर्चा में आ गया है।
पंप संचालकों पर दबाव बनाने का आरोप
पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र भाटी ने कहा कि भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी सरकारी तेल कंपनियां लगातार पंप संचालकों पर दबाव बना रही हैं। उनका कहना है कि कंपनियां ब्रांडेड फ्यूल बेचने के लिए मजबूर करती हैं, जबकि ग्राहक सामान्य पेट्रोल और डीजल की मांग करते हैं। भाटी ने आरोप लगाया कि अगर पंप संचालक कंपनियों की बात नहीं मानते तो उनके यहां ईंधन की सप्लाई प्रभावित की जाती है। इससे कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है।
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‘PM मोदी की रैलियों के दौरान उधार ईंधन’
एसोसिएशन ने राज्य सरकार के माप-तोल विभाग के अधिकारियों पर भी परेशान करने का आरोप लगाया है। भाटी का कहना है कि अधिकारी कम पेट्रोल या डीजल देने का आरोप लगाकर कार्रवाई करते हैं और पंप संचालकों को बेवजह परेशान किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के दौरान वाहनों में जो डीजल उधार दिया गया था, उसका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इस वजह से कई पंप संचालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसानों को ड्रम में डीजल देने पर रोक
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि गांवों में किसान जनरेटर और इंजन चलाने के लिए डीजल खरीदते हैं। आमतौर पर किसान ड्रम में डीजल ले जाते हैं, लेकिन अब तेल कंपनियों ने ड्रम में डीजल देने पर रोक लगा दी है। संचालकों का कहना है कि इससे किसानों को परेशानी हो रही है और पंप मालिकों को भी ग्राहकों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ती कीमतों से कारोबार पर असर
डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, लगातार पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें बढ़ने से लोगों ने वाहनों का इस्तेमाल कम कर दिया है। इसका असर सीधे बिक्री पर पड़ा है। पंप संचालकों का कहना है कि बढ़ते खर्च और कम होती बिक्री के बीच कारोबार संभालना मुश्किल हो रहा है। इसी कारण तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों के विरोध में एक जून से हड़ताल का फैसला लिया गया है।
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जांच में 110 पेट्रोल पंपों पर गड़बड़ी
इधर राज्य सरकार के खाद्य विभाग की ओर से 13 मई से 18 मई तक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान राजस्थान के अलग-अलग जिलों में 226 पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया गया। जांच में 110 पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग तरह की अनियमितताएं मिलीं। इनमें 60 पेट्रोल पंप ऐसे पाए गए जहां ग्राहकों को कम पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा था। कार्रवाई करते हुए 103 नोजल सीज किए गए।
