भारत का अनोखा गांव, जहां नाम से नहीं बल्कि सीटी की धुन से बुलाए जाते हैं लोग, जानिए इसके पीछे का रहस्य!
MeghalayaWhistling Village: मेघालय के कोंगथोंग गांव में लोग एक-दूसरे को पुकारने के लिए नाम नहीं बल्कि सीटी की खास धुन का इस्तेमाल करते हैं। जानिए इस अनोखे व्हिसलिंग विलेज की खासियत।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
मेघालय कोंगथोंग सीटी बजाने वाला गांव (सोर्स- एआई नीर्मित)
Meghalaya Kongthong Whistling Village: भारत में लगभग 6.5 लाख से ज्यादा गांव है। सभी गांवों की अपनी एक अलग पहचान होती है। कई गांवों के नाम काफी अटपटे होते है, तो वहीं कुछ गाव के नाम लेने में लोगों की हंसी छूट जाती है। लेकिन क्या आप जानते है ,हमारे देश में एक ऐसा भी गांव है। जो भारत के उत्तर – पूर्व में ऊंची पहाड़ियों और गहरी घाटियों के बीच में घिरा हुआ है। इस गाँव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ लोग एक-दूसरे को बुलाने के लिए सामान्य नामों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। जी हाँ, इस अनोखी जगह पर इंसानों के पारंपरिक नाम नहीं होते, बल्कि हर व्यक्ति के लिए एक खास धुन यानी म्यूजिकल ट्यून (Musical Tune) तय की जाती है। जब किसी को किसी को पुकारना होता है, तो वे नाम पुकारने के बजाय सीटी बजाकर या उस खास धुन के जरिए एक-दूसरे को आवाज देते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और यहाँ के जनजीवन का एक अहम् हिस्सा बन चुकी है। तो आइए जानते है इस गांव की खासियत और इसके पीछे की वजह।
जानिए कौन से राज्य में स्थित है, यह गांव?
भारत का यह गांव, मेघालय राज्य में स्थित है। जिसका नाम कोंगथोंग है। यह पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित है, जो मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां लोग एक दूसरे को सीटी की धुन से बुलाते है इस गांव के अंदर प्रवेश करते ही लोगों को सीटी की धुनें सुनाई देने लगती है
बच्चे के जन्म होते ही मां बना देती है, अनोखी धुन
इस गांव की कहानी सिर्फ सीटी बजाने तक ही सीमित नहीं है। यहां मां के द्वारा निकाली गई एक छोटी सी धुन बच्चों के लिए निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है। जिससे बच्चे तुरंत खिचें चले आते है। जहां बच्चे के जन्म लेने के बाद मां उसके लिए एक अलग धुन बनाती है, उसी धुन से बच्चे को बार – बार पुकारती है। और बच्चे के बड़े हो जाने पर गांव के लोग भी उसी धुन में सीटी बजाकर बुलाते है।
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स्थानीय भाषा में इस धुन को क्या कहा जाता है?
आपको बता दे की कोंगथोंग में बच्चे के जन्म के बाद मां के द्वारा रखी गई सीटी की इस धुन को जिंग्रवई लॉबेई कहा जाता है। लोगों का मानना है की पहाड़ियों के बीच इसकी धुन बहुत दूर तक फैलती है जिससे लोगो के कानों में यह आवाज गुंजे और उन्हें सुनाई दे सके।
व्हिसलिंग विलेज के नाम से जाना जाता है, यह गांव
पीढ़ियों से चली आ रही सीटी बजा के लोगों को बुलाने की इस परंपरा वाले गांव को व्हिसलिंग विलेज के नाम से भी जाना जाता है। सीटी बजाकर बुलाना यह एक परंपरा ही नहीं बल्कि यहां के लोगों के लिए रोजमर्रा की जरुरत भी बन गई है। जो आज भी इस गांव में चलती आ रही है। इतना ही नहीं यहां के पहाड़ियों के बीच में गुंजने वाली सीटी की मधुर आवाज को सुनने के लिए दुनिया भर से लोग आते रहते हैं।
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जानिए कौन से जनजाति के लोग रहते है
कोगथोंग गांव के लोग खासी जनजाती के संबंध रखते है। इस गांव के बोलचाल के लिए खासी भाषा का प्रयोग करते है जो यहां की पारंपरिक भाषा मानी जाती है।
