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जानिए जगन्नाथ मंदिर के इन 4 खास दरवाजों का रहस्य, क्या तीसरी सीढ़ी पर पैर रखते ही होते हैं यमलोक के दर्शन

ओडिशा में चुनाव से पहले भाजपा ने प्रचार के दौरान जगन्नाथ धाम के चारों द्वार खुलवाने को लेकर जनता से वादा किया था जिसे निभाते हुए नए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने खुलवाने का एलान कर दिया है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Apr 30, 2025 | 02:13 PM

जगन्नाथ मंदिर का रहस्य (फाइल फोटो)

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भारत के ओडिशा राज्य के प्रसिद्ध मंदिर जगन्नाथ धाम के चारों दरवाजों को नए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने खुलवाने का ऐलान कर दिया है जिसके साथ ही अब भक्त इन दरवाजों के दर्शन और रहस्य को जान पाएंगे। ओडिशा में चुनाव से पहले भाजपा ने प्रचार के दौरान जगन्नाथ धाम के चारों द्वार खुलवाने को लेकर जनता से वादा किया था जिसे निभाते हुए फैसला लिया है। इन सभी द्वार के नहीं खुलने से भक्तों को दर्शन करने के लिए दिक्कत आ रही थी।

जानिए धाम के इन 4 दरवाजों के बारे में

धरती के पवित्र बैकुंड धाम के नाम से जाना जाने वाले जगन्नाथ धाम के इन 4 दरवाजों की धार्मिक मान्यता और खासियत है जिनके बारे में जानेंगे आज

जगन्नाथ मंदिर जितना विशाल है उतने ही यहां के दरवाजों की कहानी भी कुछ खास है मंदिर के बाहरी दीवार पर पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी चार द्वार हैं. पहले द्वार का नाम सिंहद्वार (शेर का द्वार), दूसरे द्वार का नाम व्याघ्र द्वार (बाघ का द्वार), तीसरे द्वार का नाम हस्ति द्वार (हाथी का द्वार) और चौथे द्वारा का नाम अश्व द्वार (घोड़े का द्वार) है जिन्हें धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है वहीं पर इनकी खासियत भी इस तरह से मानी जाती है।

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जगन्नाथ मंदिर के आसपास भी घूमने के लिए है कई खास जगहें, मिलेगा नया अनुभव

1- मंदिर का पूर्वी द्वार सिंहद्वार

इस दरवाजे को जगन्नाथ मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार कहते है जहां पर इस द्वार पर झुकी हुई मुद्रा में दो शेरों की प्रतिमाएं हैं, इसे लेकर मान्यता है कि, इस द्वार से मंदिर में प्रवेश करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

2-मंदिर का पश्चिमी द्वार व्याघ्र द्वार

इस दरवाजे की बात की जाए तो, जगन्नाथ मंदिर के इस प्रवेश द्वार पर बाघ की प्रतिमा मौजूद है जो हर पल धर्म के पालन करने की शिक्षा देता है, कहते हैं बाघ को इच्छा का प्रतीक भी माना जाता है जो मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। विशेष भक्त और संत इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते हैं।

जगन्नाथ मंदिर के 4 दरवाजों का रहस्य (सोशल मीडिया)

3- मंदिर का उत्तरी द्वार हस्ति द्वार

जगन्नाथ मंदिर के इस द्वार के दोनों तरफ हाथियों की प्रतिमाएं लगी हैं जिसमें हाथी को माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसे लेकर कहा जाता है कि मुगलों ने आक्रमण कर हाथी की इन मूर्तियों को क्षति-विकृत कर दिया था जिसके बाद में इनकी मरम्मत कर मूर्तियों को मंदिर उत्तरी द्वार पर रख दिया गया, कहा जाता है कि ये द्वार ऋषियों के प्रवेश के लिए होता है।

4-मंदिर का दक्षिणी द्वार अश्व द्वार

मंदिर के इस द्वार के दोनों तरफ घोड़ों की मूर्तियां लगी हुई हैं, इसकी खासियत है कि, खास बात यह है कि घोड़ों की पीठ पर भगवान जगन्नाथ और बालभद्र युद्ध की महिमा में सवार हैं इस द्वार को विजय के रूप में जाना जाता है।

22 सीढ़ियों को पार करके ही मिलते है भगवान के दर्शन

जगन्नाथ मंदिर में जहां पर 4 दरवाजों की अपनी खासियत है वहीं पर यहां पर कुल 22 सीढ़िया है जिनका रहस्य भी अलग है जिन्हें मानव जीवन की बाईस कमजोरियों का प्रतीक कहा जाता है। 22 सीढ़ियों के बारे में तो लिखा गया है लेकिन यहां पर देखने पर वर्तमान में 18 सीढ़ियां ही नजर आती है। अनादा बाजार की तरफ की दो सीढ़ियों को जोड़ दें तो ये इनकी संख्या 20 है. 21 और 22वीं सीढ़ी मंदिर की रसोई की तरफ हैं. इन सभी सीढ़ियों की ऊंचाई और चौड़ाई 6 फीट और बात अगर लंबाई की करें तो यह 70 फीट है. मंदिर की कुछ सीढ़ियां 15 फीट चौड़ी भी हैं. वहीं कुछ 6 फीट से भी कम हैं। दर्शन के लिए इन सीढ़ियों को पार करना जरूरी है।

क्यों मंदिर की तीसरी सीढ़ी को कहते हैं यमलोक का द्वार

22 सीढ़ियों में से तीसरी सीढ़ी का अलग रहस्य है कहते है मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर पैर नहीं रखना होता इस पर पैर रखा तो आपको बैकुंड धाम के दर्शन नहीं बल्कि यमलोक के दर्शन करने के लिए मिलेंगे। जी हां इस सीढ़ी को यम शिला कहते है। यही वजह है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए जाते समय तीसरी सीढ़ी पर पैर न रखने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ ने तीसरी सीढ़ी यमराज को देते हुए कहा था कि जब भी कोई भक्त दर्शन से लौटते समय तीसरी सीढ़ी पर पैर रखेगा, तो उसके सभी पुण्य खत्म हो जाएंगे और वह बैकुंठ की बजाय यमलोक जाएगा।

Know the secret of these 4 special doors of jagannath temple

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Published On: Jun 14, 2024 | 11:23 AM

Topics:  

  • Jagannath Temple

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