पुरी जगन्नाथ मंदिर में मोबाइल पर लगा बैन; अब अधिकारी, पुलिसकर्मी और सेवादार भी नहीं ले जा सकेंगे फोन
Puri Jagannath Temple प्रशासन ने अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और सेवादारों के मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाना बताया जा रहा है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
श्री जगन्नाथ मंदिर, फोटो- सोशल मीडिया
Puri Jagannath Temple Mobile Ban: ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने एक बड़ा फैसला लिया है। मंदिर में अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और बाद में सेवादारों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई है। यह निर्णय 20 सितंबर 2025 को मंदिर की *छत्तीसा निजोग’ की अहम बैठक में लिया गया।
SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने बताया कि पहले चरण में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मंदिर परिसर में मोबाइल का उपयोग करने से रोका जाएगा। इसके बाद यह नियम मंदिर सेवादारों तक भी लागू होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आपात स्थिति या जरूरी संदेशों के आदान-प्रदान के लिए अधिकारी केवल निर्धारित स्थान पर जाकर मोबाइल का इस्तेमाल कर सकेंगे।
अब पुजारी और पुलिस कर्मी भी नहीं ले जा सकेंगे फोन
पाधी ने कहा कि मंदिर प्रशासन इस संबंध में जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि श्रद्धालुओं और आम आगंतुकों के मोबाइल फोन तथा कैमरा उपकरण मंदिर में ले जाने पर पहले से ही प्रतिबंध है।
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नए नियमों का उद्देश्य क्या है?
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने मंदिर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर में अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। यह कदम मंदिर के भीतर बढ़ते अवांछित व्यवहार और वीडियो बनाने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया। SJTA का मानना है कि मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग मंदिर की शांति और आध्यात्मिक गरिमा को प्रभावित करता है। बैठक में यह भी तय हुआ कि कार्तिक मास के बाद ‘क्यू-आधारित दर्शन प्रणाली’ लागू की जाएगी, ताकि भक्तों को सहज और व्यवस्थित दर्शन मिल सके।
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श्री जगन्नाथ मंदिर का महत्व
पुरी का जगन्नाथ मंदिर भारत के प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ (भगवान विष्णु/कृष्ण का स्वरूप), उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। विशेष रूप से *जगन्नाथ रथ यात्रा* न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसमें देश-विदेश से भक्त भारी संख्या में भाग लेते हैं और यह आयोजन एक विशाल धार्मिक उत्सव का रूप ले चुका है।
