मॉस्को (सौ. फ्रीपिक)
नवभारत डेस्क: रूस की राजधानी मॉस्को भारतीय सैलानियों के लिए नया और बजट लग्जरी डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। पहले भारतीय टूरिस्टों की पहली पसंद यूरोप, एशिया और अन्य दूसरे देश हुआ करते थे। लेकिन अब मॉस्को की संस्कृति, आधुनिकता और हॉस्पिटैलिटी के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2025 के पहले 6 महीनों में यहां आने वाले भारतीय टूरिस्टों की संख्या में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
मॉस्को की बढ़ती पॉपुलैरिटी की सबसे बड़ी वजह ई वीजा सिस्टम है जो भारतीयों के लिए टूरिज्म को आसान बना रही है। पहले रूस का वीजा लेना काफी मुश्किल हुआ करता था लेकिन अब कोई भी व्यक्ति चार दिनों में ऑनलाइन वीजा ले सकता है। इसके लिए पहले की तरह होटल बुकिंग और इन्विटेशन लेटर की जरूरत नहीं होगी। साथ ही भारत से मॉस्को के लिए सीधे फ्लाइट्स और सस्ते ट्रैवल पैकेज भी उपलब्ध हैं। यही चीजें भारतीय टूरिस्टों को आकर्षित करती है।
पहले के समय में रूस का वीजा प्रोसेस बहुत लंबा और जटिल था लेकिन अब ई वीजा की वजह से पर्यटक जल्द घूमने का प्लान कर सकते हैं। इस बदलाव से मॉस्को के टूरिस्ट सेक्टर को नया बूस्ट मिला है।
साल 2025 के पहले 7 महीनों में होटल में विदेशी मेहमानों की संख्या 14 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। खास बात यह है कि प्रीमियम होटल में सबसे ज्यादा बुकिंग भारतीयों द्वारा की गई है। साथ ही मॉस्को सरकार भारतीय टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़ने के लिए कई कदम उठा रही है।
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रूस और भारत के बीच का रिश्ता काफी पुराना रहा है। मॉस्को में भारतीय संगीत, योग और बॉलीवुड फिल्मों की लोकप्रियता अब भी देखी जा सकती है। हर साल मॉस्को में इंडिया फेस्ट और योग दिवस जैसे कार्यक्रम भव्य तरीके से मनाए जाते हैं। जहां बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं। वहीं, साल 2025 के समर इन मॉस्को फेस्टिवल में भारतीय कल्चर से जुड़े कई आयोजन होते हैं जिसमें इंडियन टूरिस्ट काफी दिलचस्पी लेते हैं।
भारत और रूस के बीच अब टूरिज्म सिर्फ यात्रा तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक सांस्कृतिक साझेदारी में बदल गया है। कहा जा सकता है कि आने वाले समय में रूस, खासकर मॉस्को भारतीय यात्रियों के लिए यूरोप का सस्ता और अच्छा विकल्प बन जाएगा।