7 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत जहां पर होने जा रही हैं वहीं पर भक्त घर औऱ पंडालों में भगवान श्रीगणेश का आगमन करेंगे। यहां पर गणेश चतुर्थी पर आप भी अपने घर पर गणपति स्थापना का प्लान कर रहे हैं औऱ बप्पा को शानदार तरीके से लाने का प्लान कर रहे हैं तो यह बेस्ट डेकोरेशन आइडियाज आपको पसंद आ सकते है। इसके जरिए आप अपने बप्पा का मंडप तैयार कर सकते है।
नवभारत डेस्क: शनिवार यानी 6 सितंबर को गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर गणपति बाप्पा का आगमन होने वाला है। ऐसे में सभी श्रदधालु बड़ी संख्या में गणपति के मंदिर दर्शन करने के लिए पहुंचते है। जहां भक्त भगवान श्री गणेश से अपनी मानोकामना पूरी करने के लिए दर्शन करने आते है।
महाराष्ट्र में बड़े तौर पर गणेश चतुर्थी को मनाया जाता है। यहां के इन मंदिरों में भक्त दूर-दूर से पूजा अर्चना करने आते हैं। यहां कई जगहों पर श्री गणेश के बड़े भव्य पूराने मंदिर भी शामिल है जहां कहा जाता है कि वहां दर्शन मात्र से गणेश जी आपके सारे दुख हर लेते है और यहां भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी होती है।
तो चलिए इस गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर दर्शन करने के लिए आपको महाराष्ट्र में स्थित प्रसिद्ध गणेश मंदिरों के बारे में बताते हैं। जहां आपकी हर मनोकामना बाप्पा पूरी करते है।
यह मंदिर भगवान गणेश का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर सें स्थित गणेश जी की मूर्ति की सूड़ दाईं ओर मुड़ी हुई है, कहा जाता है कि इस तरह की मूर्ति वाले मंदिरों को सिद्धपीठ कहा जाता है। इस वजह से यहा पर ये भी माना जाता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती है। जानकारी की माने तो इस मंदिर का निर्माण 19 नवंबर 1801 को हुआ था।
सिद्धिविनायक मंदिर (सौजन्य-पिनटरेस्ट)
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दग्दूशेठ हलवाई गणेश मंदिर महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। यहां गणेश चतुर्थी के दौरान भक्तों की भारी भीड़ होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि यहां मनोकामना करने से भक्तों की इच्छाएं 30 दिनों के भीतर पूरी हो जाती है। इस मंदिर का निर्माण एक प्रसिद्ध हलवाई दग्दूशेठ ने कराया था इसलिए इस मंदिर का नाम दग्दूशेठ हलवाई गणेश मंदिर पड़ा। यहां दर्शन करने के लिए सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती हैं।
दग्दूशेठ हलवाई गणेश मंदिर (सौजन्य-पिनटरेस्ट)
गणपतीपुळे गणेश मंदिर यह रत्नागिरी में समुद्र किनारे स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन करने के लिए आते है। इस मंदिर का इतिहास काफी दिलचस्प है कहा जाता है कि ये 400 साल पुराना मंदिर है। लोक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि यहां स्थित गणेश जी की मूर्ति स्वयंभू है।
गणपतीपुळे गणेश मंदिर (सौजन्य-पिनटरेस्ट)
अष्टविनायक में से पांचवे गणेश हैं चिंतामणि गणपति। यह मंदिर महाराष्ट्र पुणे जिले के थेऊर नामक गांव में स्थित है। यह मंदिर भगवान गणेश के आठ पीठों में से एक हैं। कहा जाता है यहां श्रीगणेश भक्तों के सारे दुख हर लेते है और उन्हें चिंतामुक्त कर देते है और उनका दुख हर लेते है इसलिए इन्हें चिंतामणि कहा जाता है। इस मंदिर की ऐसी मान्यता है कि स्वयं ब्रम्हा ने अपने विचलित मन को शांत करने के लिए इस जगह पर तपस्या की थी।
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भगवान श्रीगणेश के और भी ऐसे चमत्कारी मंदिर है जहां इस गणेश चतुर्थी आप दर्शन करने जा सकते है। जिसके बारे में हम आपको बताते रहेंगे।