लखनऊ का ऐसा सिनेमा हॉल जहां सीट पर महसूस होता है हर एक सीन, बारिश की एक-एक बूंद, जानें
- Written By: दीपिका पाल
लखनऊ में स्थित है 9D सिनेना हॉल (सौ.सोशल मीडिया)
मुस्कुराइए आप लखनऊ में, इस अदब के दीवाने तो हर कोई है क्या आपको पता है इस शहर में ऐतिहासिक इमारतों और पार्कों को देखने के अलावा भी कुछ और है। एक ऐसा सिनेमा हॉल जहां पर आपको मूवी के हर एक सीन का देखने का मौका करीब से मिलता है। हम बात कर रहे है शहर के हजरतगंज स्थित सहारा मॉल में टॉप फ्लोर पर बनें 9D सिनेमा हॉल की। जहां पर फिल्में देखकर आप हर एक दृश्य का खास अनुभव कर पाएंगे।
कैसा होता है इस सिनेमा हॉल का अनुभव
यहां पर सिनेमाहॉल में आप जब मूवी देख रहे होंगे तो उस दौरान हर एक घटना अपनी कुर्सी पर महसूस होती है। यहां पर सीन जैसा होता है आपकी कुर्सियां हिलने लगती है अगर बारिश का सीन आए तो दर्शकों के ऊपर बीच-बीच में पानी भी स्प्रे किया जाता है। यह आपको 9D सिनेमा का पूरा अनुभव कराता है। यहां पर वीकेंड में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को काफी भीड़ होती है। बच्चों समेत फैमिली इसे देखने के लिए आते है।
बच्चों के लिए शानदार है सिनेमा हॉल
इस 9डी सिनेमा हॉल में आप घोस्ट स्टोरी, फॉरेस्ट एरिया स्टोरी, टॉयज स्टोरी, फॉरेस्ट एडवेंचर, रोलर कोस्टर, वाइल्ड कोस्टर ट्रेन, टॉन्ब राइडर समेत कई फिल्में देख सकते हैं। इन फिल्मों के हर सीन में रियलस्टिक अनुभव देखने के लिए मिलता है। इसे खासकर बच्चों के लिए बेस्ट माना गया है।
सम्बंधित ख़बरें
आधार नंबर शेयर करने से डर लग रहा है? तुरंत अपनाएं ये ट्रिक, फ्रॉड होगा लगभग खत्म
वर्चुअल रियलिटी से घर बैठे दुनिया की सैर, बुजुर्गों के लिए तकनीक बनी सहारा
Virtual Terror: अब डिजिटली पैर पसार रहा आतंकवाद, निशाने पर यंग प्रोफेशनल्स; फरीदाबाद से हुआ पर्दाफाश
AI गर्लफ्रेंड्स का बढ़ता ट्रेंड बना खतरा, Perplexity के CEO ने दी गंभीर चेतावनी
लखनऊ में स्थित है 9D सिनेना हॉल की तस्वीर (सौ.सोशल मीडिया)
जानिए कितना है यहां मूवी का टिकट
इस अनोखे सिनेमा हॉल में मूवी का लुत्फ उठाने के लिए 100 रुपए की टिकट रखी गई जो प्रति व्यक्ति आपको 100 रूपए देय होती है। यहां पर सिनेमा हॉल में दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है यानि इस सिनेमा हॉल में एक बार में 10 लोग बैठ कर देख सकते हैं. इसका समय सुबह 10:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक होता है।
इस तरह का सिनेमाहॉल केवल लखनऊ में ही नहीं बल्कि बड़े औऱ मेट्रो सिटीज में देखने के लिए मिलता है। यहां पर बच्चों के इन सिनेमाहॉल को विर्चुअल रियलिटी से जोड़ने का एक जरिया होता है।
