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Virtual Terror: अब डिजिटली पैर पसार रहा आतंकवाद, निशाने पर यंग प्रोफेशनल्स; फरीदाबाद से हुआ पर्दाफाश

Virtual Terror: फरीदाबाद-दिल्ली में सामने आया आतंकी मॉड्यूल दिखाता है कि आतंकवाद अब डिजिटल नेटवर्क और क्लाउड-आधारित प्रशिक्षण के जरिए हाइली एजुकेटेड प्रोफेशनल्स तक फैल चुका है, जो सबसे खतरनाक रूप है।

  • By प्रिया सिंह
Updated On: Nov 18, 2025 | 08:31 AM

सोर्स- फ्रीपिक

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Virtual Terror Dangerous Chapter Of  Terrorism: आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब यह सिर्फ पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है। अब मोबाइल फोन, लैपटॉप, एन्क्रिप्टेड चैट और क्लाउड-आधारित ट्रेनिंग आतंकवादियों के सबसे बड़े और सबसे प्रभावी हथियार बन चुके हैं। इंटरपोल और रैंड कॉर्पोरेशन की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक आतंकवाद एक खतरनाक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां भर्ती, ट्रेनिंग और ऑपरेशन के आदेश अब पूरी तरह से डिजिटल दुनिया पर निर्भर हैं। भारत में फरीदाबाद और दिल्ली में सामने आए डॉक्टरों से जुड़े आतंकी मॉड्यूल ने इस पैटर्न की पुष्टि की है। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल कट्टरता अब समाज के ‘सफेदपोश’ (White Collar) और उच्च-शिक्षित वर्ग (Highly Educated Class) में भी जड़ें जमा चुकी है।

डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए आतंकवाद और कट्टरता का फैलाव

पिछले दो दशकों में आतंकवाद के कई बड़े हमलों जैसे- ट्विन टावर (2001), पेरिस (2015) और काबुल (2021) की जांचों से यह साफ हो चुका है कि आतंकी संगठनों का केंद्र अब डिजिटल हो गया है। काउंटर टेररिज्म डायरेक्टरेट के अनुसार फरीदाबाद-दिल्ली मॉड्यूल भी उन्हीं नेटवर्क रणनीतियों पर आधारित है।

इस मॉड्यूल में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें एमबीबीएस डॉक्टर, मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर और उच्च शिक्षित तकनीकी-जानकार युवा शामिल थे। यह संकेत देता है कि आतंकवाद अब सिर्फ संगठित अपराधियों के बजाय समाज के सम्मानित और प्रोफेशनल क्लास में भी आ चुका है।

भर्ती के लिए कट्टरपंथी सामग्री क्लाउड पर अपलोड की जाती है, प्रशिक्षण एन्क्रिप्टेड (Encrypted) ऐप्स पर होता है, निर्देश डिजिटल नोट्स में दिए जाते हैं और पैसों का लेन-देन भी पूरी तरह से ऑनलाइन होता है। यह ‘वर्चुअल आतंक’ (Virtual Terror) पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती है।

धार्मिक नैरेटिव और डिजिटल इंजीनियरिंग

इंटरपोल और रैंड कॉर्पोरेशन के अनुसार, कट्टरपंथी संगठन धर्म का उपयोग भावनात्मक हथियार के रूप में करते हैं। फरीदाबाद-दिल्ली मॉड्यूल में भी यही पैटर्न देखा गया है। ये संगठन धार्मिक ग्रंथों और इतिहास की अपने हिसाब से मनमानी व्याख्या करते हैं और अन्य समुदायों के प्रति नफरत फैलाते हैं। वे तथाकथित बलिदान को महिमामंडित करने वाले कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल करते हैं।

आतंकी संगठनों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नेक्स्ट ग्रीन टेरर इनक्यूबेशन मॉडल में पहचान-संकट को बढ़ावा दिया जाता है, धार्मिक न्याय का नैरेटिव बुना जाता है, ग्रुप चैट के माध्यम से ‘भाईचारा’ बनाया जाता है और फिर मनोवैज्ञानिक कंडीशनिंग की जाती है। इस प्रक्रिया का अंतिम चरण ‘वीडियो ग्लोरी वादा’ होता है, जिसमें आतंकवादियों को मृत्यु को एक महान बलिदान के रूप में दिखाया जाता है।

फरीदाबाद-दिल्ली मॉड्यूल- 7-स्टेप कट्टरता मॉडल

भारत के इस मॉड्यूल की जांच से वैश्विक 7-स्टेप मॉडल का पता चला है-

  1. सोशल मीडिया टारगेटिंग: सोशल मीडिया पर कमजोर या टार्गेटेड यूथ की पहचान करना।
  2. पहचान-संकट: उनकी पहचान और अस्तित्व के संकट को हवा देना।
  3. धार्मिक-न्याय नैरेटिव: धार्मिक अन्याय की झूठी कहानी सुनाना।
  4. ग्रुप चैट के माध्यम से भाईचारा: एन्क्रिप्टेड ग्रुप चैट में शामिल करके भावनात्मक जुड़ाव बनाना।
  5. एन्क्रिप्टेड ट्रेनिंग: गुप्त ऐप्स के जरिए ऑनलाइन ट्रेनिंग देना।
  6. मिशन की मनोवैज्ञानिक कंडीशनिंग: मिशन के लिए मानसिक रूप से तैयार करना।
  7. वीडियो ग्लोरी वादा: मृत्यु को महान बलिदान के रूप में पेश करके प्रेरणा देना।

सबसे खतरनाक बात यह है कि इस मॉड्यूल में किसी भी हथियार प्रशिक्षण शिविर में शारीरिक उपस्थिति की जरूरत नहीं थी, पूरा प्रशिक्षण ऑनलाइन था। इंटरपोल इसे ‘नेक्स्ट ग्रीन टेरर इनक्यूबेशन मॉडल’ कह रहा है, जहां आतंकवादी अब पर्यावरण आंदोलन, खेती या क्लाइमेट एक्टिविज्म जैसे नाम पर गुप्त रूप से अपने कैंप, फंड और भर्ती नेटवर्क चला रहे हैं।

यह भी पढ़ें: ‘ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ ट्रेलर…जंग के लिए हमेशा तैयार रहना होगा’, इंडियन आर्मी चीफ दी चेतावनी?

डिजिटल निगरानी और मनोवैज्ञानिक परामर्श

इस नए खतरे से निपटने के लिए पारंपरिक सुरक्षा के तरीके काफी नहीं हैं। समाधान के लिए डिजिटल डी-रेडिकलाइजेशन और साइबर सर्विलांस (Cyber Surveillance) को मजबूत करना जरूरी है। इंटरनेट, एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म, डार्क-वेब और सोशल मीडिया पर चल रहे कट्टरपंथी नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। इसके साथ ही, मेडिकल, इंजीनियरिंग और विश्वविद्यालय जैसे प्रोफेशनल ऑर्गनाइजेशन में मनोवैज्ञानिक और नैतिक परामर्श (Psychological and Ethical Counselling) की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि हाईली एजुकेटेड प्रोफेशनल भटकने से बच सकें।

Virtual terror faridabad delhi module unlocks a dangerous chapter of white collar terrorism

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Published On: Nov 18, 2025 | 08:23 AM

Topics:  

  • Delhi Blast
  • Digital World
  • Faridabad
  • Islamic Terrorism
  • terrorist activities
  • Virtual Reality

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