Ashwini Vaishnaw (Source. Navbharat Live)
Ashwini Vaishnaw On AI Summit: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया अब एक साझा दिशा में आगे बढ़ रही है और इस बार नेतृत्व भारत के हाथ में दिख रहा है। नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit के समापन पर 86 देशों और दो अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने AI Impact Summit Declaration पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने इसे वैश्विक समर्थन का बड़ा संकेत बताया। इस घोषणा पर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, डेनमार्क और जर्मनी जैसे बड़े देशों ने भी सहमति जताई।
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ह्यूमन-सेंट्रिक AI विज़न को दुनिया ने मान लिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसोर्स को डेमोक्रेटाइज़ करना ताकि AI फैसिलिटी, सर्विस और टेक्नोलॉजी समाज में हर किसी तक पहुंच सकें, इसे सभी ने मान लिया है।” उन्होंने बताया कि यह ढांचा “welfare of all, and happiness of all” यानी सभी के कल्याण और खुशहाली के सिद्धांत पर आधारित है।
वैष्णव ने साफ किया कि AI का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं होना चाहिए। “सिर्फ़ आर्थिक विकास ही नहीं, सामाजिक सौहार्द को भी ध्यान में रखना होगा। सुरक्षा और भरोसा केंद्र में हैं, उन्हें मुख्य बातों में लाया गया है।” यानी AI के विकास में सुरक्षा, भरोसा और सामाजिक संतुलन को केंद्र में रखा जाएगा। सरकार का फोकस एक सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत AI इकोसिस्टम तैयार करने पर है।
समिट को “grand success”बताते हुए मंत्री ने कहा कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में 250 बिलियन डॉलर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धताएं मिली हैं, जबकि करीब 20 बिलियन डॉलर वेंचर कैपिटल और डीप-टेक निवेश के रूप में आएंगे। पांच लाख से अधिक लोगों की भागीदारी ने यह दिखा दिया कि देश और दुनिया दोनों भारत की AI पहल में गंभीर रुचि रखते हैं।
इस समिट में Sundar Pichai, Sam Altman, Brad Smith और Dario Amodei जैसे वैश्विक टेक लीडर्स ने हिस्सा लिया। “एग्ज़िबिशन में पाँच लाख से ज़्यादा विज़िटर्स ने हिस्सा लिया, बहुत कुछ सीखा, और दुनिया भर के कई एक्सपर्ट्स से बातचीत की। दुनिया के लगभग हर बड़े AI प्लेयर ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कई स्टार्टअप्स को अपना काम दिखाने का मौका मिला। कुल मिलाकर, डिस्कशन की क्वालिटी बहुत अच्छी थी।” वैष्णव ने कहा।
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इस समिट ने भारत को वैश्विक AI गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की चर्चाओं में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। लगभग सभी प्रमुख देशों ने सहयोग के लिए सहमति जताई है। अब सवाल यह है कि क्या यह वैश्विक भरोसा भारत को AI महाशक्ति बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा? आने वाले साल इसका जवाब देंगे।