AI युग में भारत की बड़ी छलांग: 2026 से शुरू होंगी 4 सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियां, युवाओं के लिए सुनहरा मौका

AI Mission: चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि AI के दौर में पूरी सेमीकंडक्टर ताकत बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। "Semiconductor Workforce in the Age of AI" सत्र के दौरान हुआ।
India's big leap into the AI ​​era: 4 semiconductor factories to open by 2026, a golden opportunity for youth
AI Impact Summit 2026 (Source. PIB)
Published on
Updated on

India Semiconductor Mission: भारत अब सिर्फ चिप डिजाइन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि AI के दौर में पूरी सेमीकंडक्टर ताकत बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। "Semiconductor Workforce in the Age of AI" सत्र के दौरान साफ संकेत मिला कि देश का अगला लक्ष्य गहराई से प्रशिक्षित, इंडस्ट्री-रेडी टैलेंट तैयार करना है, जो डिजाइन से लेकर एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी चेन को समझे।

हर राज्य से उभर रही चिप डिजाइन प्रतिभा

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने देश की व्यापक तैयारी को रेखांकित करते हुए कहा, "असम से लेकर जम्मू-कश्मीर तक, केरल से लेकर तमिलनाडु तक, भारत के लगभग हर हिस्से में छात्र अब खुद चिप्स डिज़ाइन कर रहे हैं। इंटेलिजेंस के इस AI-ड्रिवन युग में, सेमीकंडक्टर हमारे टेक्नोलॉजी आर्किटेक्चर की सबसे ज़रूरी लेयर्स में से एक होगा, और यह क्षमता आने वाले कई सालों तक एक बड़ी राष्ट्रीय ताकत बनेगी।" इस बयान से स्पष्ट है कि भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन अब कुछ शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है।

डिजाइन से आगे, अब मैन्युफैक्चरिंग में नेतृत्व की तैयारी

आईटी मंत्रालय के सचिव S. Krishnan ने कहा, "यह सेशन भारत के दो बड़े मिशन: इंडिया AI मिशन और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मेल को दिखाता है। सेमीकंडक्टर AI की कहानी का सेंटर हैं, ठीक वैसे ही जैसे AI सेमीकंडक्टर की कहानी का सेंटर बनता जा रहा है। भारत के लिए एक भरोसेमंद, लंबे समय का पार्टनर बनने के लिए, यह ज़रूरी है कि हम डिज़ाइन से आगे बढ़ें, जहाँ हम पहले से ही दुनिया की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन टीम में 20% का योगदान देते हैं, ताकि एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में लीडर बन सकें। हमने देश भर में 10 बड़े सेमीकंडक्टर प्लांट के लिए पहले ही कमिटमेंट कर दिया है। कम से कम चार 2026 तक प्रोडक्शन शुरू कर देंगे, और बाकी भी सही समय पर शुरू हो जाएँगे। इसके अलावा, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पूरे इकोसिस्टम को कवर करेगा, जिसमें सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट का घरेलू मैन्युफैक्चरिंग भी शामिल है।" यानी 2026 से कम से कम चार बड़ी फैक्ट्रियां उत्पादन शुरू करेंगी, जो देश में रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता दोनों को नई दिशा देंगी।

सिर्फ स्किल नहीं, पूरी समझ जरूरी

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में केवल छोटे-छोटे कोर्स पर्याप्त नहीं हैं। इंजीनियरों और तकनीशियनों को डिवाइस फिजिक्स, प्रोसेस इंटीग्रेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की गहरी समझ विकसित करनी होगी।

उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को नई रफ्तार मिली है। Indian Institute of Science का "SemiFirst" मॉडल इसी दिशा में काम कर रहा है, जहां छात्रों को सिमुलेशन आधारित ट्रेनिंग के साथ वास्तविक फैब सिस्टम का अनुभव दिया जा रहा है।

AI और सेमीकंडक्टर: भविष्य की संयुक्त ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां दुनिया के बड़े सेमीकंडक्टर हब्स को मजबूत बनने में 50-70 साल लगे, भारत उस यात्रा को कम समय में पूरा करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए इंडस्ट्री, यूनिवर्सिटी और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का मजबूत तालमेल अनिवार्य है।

बात साफ है

AI युग में असली ताकत केवल मशीनों की नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाली गहरी तकनीकी समझ की होगी। अगर भारत यह लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो वह दुनिया का भरोसेमंद तकनीकी और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर बन सकता है।

Navbharat Live
navbharatlive.com