दिल का दौरा पड़ने से पहले सतर्क करेगी नई तकनीक, बनेगी खतरे की घंटी
Mini Camera: दिल की बीमारियों से बचने के लिए वैज्ञानिकों ने नई तकनीक विकसित की है, जो हार्ट अटैक से पहले ही चेतावनी दे देगी। इसमें एक मिनी कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा।
- Written By: सिमरन सिंह
Heart Attack से बचने का नया तरीका। (सौ. AI)
Heart Attack New Technology: आज के व्यस्त दौर में जहां इंसान को खुद का ख्याल रखने का भी समय नहीं है। ऐसे में हार्ट अटैक की खबरें लगातार बढ़ती जा रही है। जिसको देखते हुए इस बात की चिंता सामने आती है कि आखिर इसको रोकने या फिर इससे बचने का कोई तरीका मौजूद है या नहीं। दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जो हार्ट अटैक से पहले ही चेतावनी दे देगी। इसमें एक मिनी कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का संयोजन मरीज की नसों की निगरानी करेगा और खतरे का संकेत समय रहते जारी करेगा।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
जिन मरीजों को पहले दिल का दौरा पड़ चुका है या जिनमें हार्ट अटैक का खतरा बना रहता है, उनके लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। डॉक्टर मरीज की खून की नसों में एक मिनी कैमरा डालते हैं। यह कैमरा लगातार तस्वीरें खींचता है और उन्हें AI को भेजता है। AI तेजी से उन तस्वीरों का विश्लेषण कर लेता है और तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
पहले इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था क्योंकि तस्वीरों की जांच विशेषज्ञों को करनी पड़ती थी। सैकड़ों तस्वीरों को मैन्युअली जांचना आसान काम नहीं होता। लेकिन अब AI के इस्तेमाल से यह प्रक्रिया बेहद तेज और सटीक हो गई है। शुरुआती परीक्षणों की सफलता ने वैज्ञानिकों को बड़ी उम्मीदें दी हैं।
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नीदरलैंड में हुआ बड़ा अध्ययन
यह शोध नीदरलैंड के रैडबौड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने किया। उन्होंने हजारों मरीजों पर इस तकनीक का परीक्षण किया और अध्ययन को यूरोपीय हार्ट जर्नल में प्रकाशित किया। मरीजों की नसों को मिनी कैमरा और AI की मदद से स्कैन किया गया और उन्हें दो साल तक ट्रैक किया गया। नतीजों ने साफ कर दिया कि तकनीक हार्ट अटैक की आशंका पहले से पकड़ सकती है।
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हार्ट अटैक क्यों आता है?
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की नस ब्लॉक हो जाती है और खून का प्रवाह रुक जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर अक्सर एंजियोप्लास्टी करते हैं, जिसमें बलून की मदद से नस को चौड़ा कर स्टेंट डाला जाता है। समस्या यह है कि करीब 15% मरीजों को पहला हार्ट अटैक आने के एक साल के भीतर दोबारा अटैक हो सकता है।
कैसे मिली सफलता?
- कैमरा खून की नस के भीतर तस्वीरें लेता है।
- AI उन तस्वीरों को पढ़कर बताता है कि किस हिस्से की नस कमजोर है।
- कमजोर नस की पहचान होने पर समय रहते दवा या निवारक स्टेंट लगाया जा सकता है।
- इस शोध से उम्मीद जगी है कि भविष्य में लाखों मरीज समय रहते हार्ट अटैक से बच पाएंगे।
वोलेबर्ग, वैज्ञानिक, रैडबौड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर ने कहा, “यदि हमें पता हो कि उच्च जोखिम वाले रुकावटें किस हिस्से में हैं तो हम भविष्य में दवा तैयार करने या निवारक स्टेंट लगाने में सक्षम हो सकते हैं। इससे मरीजों को काफी फायदा समय पर ही मिल जाएगा।”
