
AirTag (Source. Apple)
Apple Tracking Device New Launch: Apple ने मंगलवार को अपने पॉपुलर ट्रैकिंग डिवाइस का नया वर्जन लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दूसरी पीढ़ी का AirTag पेश किया है, जो साल 2021 में आए पहले AirTag का अपग्रेड है। खास बात यह है कि Apple इसे AirTag 2 नहीं कह रहा, बल्कि सीधे AirTag नाम से ही बेच रहा है। इसके साथ ही पुराने AirTag को तुरंत बंद कर दिया गया है।
नया AirTag भारत में ₹3,790 में एक पीस के तौर पर मिलेगा, जबकि चार AirTag का पैक ₹12,900 में उपलब्ध होगा। कंपनी के मुताबिक यह नया डिवाइस इसी हफ्ते बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा।
AirTag एक छोटा सा मेटल ट्रैकर है, जिसकी मदद से यूजर्स अपने बैग, पर्स, चाबी, लगेज या जरूरी सामान को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। इसे की-चेन में लगाया जा सकता है, बैग में रखा जा सकता है या सूटकेस पर अटैच किया जा सकता है। डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन टेक्नोलॉजी के मामले में यह पहले से काफी आगे है।
नए AirTag में ज्यादा रेंज, ज्यादा पावर और नया Bluetooth चिप दिया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब यूजर्स अपने खोए हुए सामान को पहले से 50% ज्यादा दूरी से ढूंढ पाएंगे। यह सुधार सेकंड जेनरेशन Ultra Wideband चिप की वजह से हुआ है, जो iPhone 17, iPhone Air, Apple Watch Ultra 3 और Apple Watch Series 11 जैसे नए Apple डिवाइसेज़ में भी मौजूद है।
Apple ने नए AirTag में ज्यादा तेज आवाज वाला स्पीकर भी दिया है, जिसकी आवाज अब पहले के मुकाबले दोगुनी दूरी तक सुनी जा सकती है। इसके अलावा पहली बार यूजर्स Apple Watch से भी AirTag को ट्रैक कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए Apple Watch Series 9, Ultra 2 या उससे नया मॉडल होना जरूरी है।
पहले की तरह नया AirTag भी Apple के Find My ऐप के साथ काम करेगा। यह Bluetooth के जरिए Apple के बड़े Find My नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। जब खोया हुआ सामान किसी दूसरे Apple डिवाइस के पास आता है, तो उसकी लोकेशन अपने आप अपडेट होकर मालिक तक पहुंच जाती है।
AirTag खासतौर पर ट्रैवलर्स के बीच काफी लोकप्रिय है। कुछ साल पहले Apple ने Air India समेत कई एयरलाइंस के साथ मिलकर ऐसा फीचर शुरू किया था, जिससे यात्रियों को खोए हुए लगेज की लोकेशन शेयर करने में मदद मिली और हमेशा के लिए खोने वाले बैग्स की संख्या कम हुई।
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हालांकि AirTag की लोकप्रियता के साथ विवाद भी जुड़े रहे हैं। Bluetooth ट्रैकर्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण स्टॉकिंग से जुड़े मामलों में भी इजाफा हुआ है, जबकि कंपनियों का कहना है कि ये डिवाइस लोगों को ट्रैक करने के लिए नहीं बनाए गए हैं। ऐसे में देखना ये होगा कि ये नई तकनीक लोगों के बीच किस तरह का असर करेंगी।






