RE-NEET से पहले सरकार का बड़ा एक्शन, Telegram पर डिजिटल स्ट्राइक, क्यों पेपर लीक माफिया की पहली पसंद है यह ऐप
RE-NEET परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। जिससे कुछ हद तक पेपर लीक को रोका जा पाएगा।
- Written By: सिमरन सिंह
Telegram Ban (Source. Navbharat Desk)
Telegram Ban: पेपर लीक के इतने मामले सामने आने के बाद अब RE-NEET परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं इस नए कदम को उठाने के बाद से ही छात्रों और अभिभावकों के बीच एक सवाल तेजी से चर्चा में आ गया है कि आखिर व्हाट्सऐप और सिग्नल जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म मौजूद होने के बावजूद कार्रवाई सिर्फ टेलीग्राम पर ही क्यों हो रही है? जानकारी के लिए बता दें कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों के मुताबिक टेलीग्राम के कुछ खास फीचर्स इसे पेपर लीक गिरोहों और ऑनलाइन ठगों के लिए बेहद काम का बना देते है।
पहचान छुपाने में आसान
जैसा कि सभी को पता है कि टेलीग्राम एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है जिसके सर्वर भारत के बाहर मौजूद हैं। जिस कारण से संदिग्ध अकाउंट की पहचान करना और उसका डेटा हासिल करना भारतीय एजेंसियों के लिए आसान नहीं होता। इसमें जांच प्रक्रिया में लगने वाला समय अपराधियों को उनके निशान मिटाने और बच निकलने का मौका दे देता है और यही वो कारण है कि कई बार साइबर अपराधी और पेपर लीक नेटवर्क इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित मानते है।
2 लाख सदस्यों वाला ग्रुप फीचर बना बड़ी परेशानी
टेलीग्राम में आने वाला सबसे फेमस फीचर इसका बड़े ग्रुप बनाना है। जहां देखा जाता है कि किसी भी दूसरे मैसेजिंग ऐप्स में ग्रुप में सदस्यों की संख्या सीमित होती है। लेकिन वहीं टेलीग्राम पर एक ग्रुप में 2 लाख तक लोगों को जोड़े जा सकता हैं। ऐसे में पेपर लीक गिरोह इसी खास फीचर का फायदा उठाकर परीक्षा से पहले हजारों-लाखों छात्रों तक फर्जी प्रश्नपत्र और अफवाहें पहुंचाते हैं। इस फीचर से कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोगों तक जानकारी फैला जाती है।
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सीक्रेट चैट्स और एन्क्रिप्शन का सुरक्षा कवच
देखा तो यह भी गया है कि काफी लंबे समय से टेलीग्राम का Secret Chats फीचर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन मिलता है और बातचीत सिर्फ भेजने और प्राप्त करने वाले व्यक्ति तक ही रहती है। यही वजह है कि कई बार अवैध गतिविधियों में शामिल लोग इस फीचर का उपयोग करते हुए लेन-देन और गोपनीय बातचीत आराम से कर पाते है।
बॉट API से मिनटों में फैलता है जाल
जानकारी के लिए बता दें कि टेलीग्राम का ओपन बॉट API डेवलपर्स को ऑटोमेटेड बॉट बनाने की सुविधा देता है। लेकिन देखा गया है कि यह फीचर कई वैध कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है पर फिर भी साइबर ठग इसका गलत इस्तेमाल कर फिशिंग लिंक, फर्जी पेपर बिक्री और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों को अंजाम देते हैं।
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यूपी STF की कार्रवाई के बाद लिया गया बड़ा फैसला
बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया था जो टेलीग्राम चैनलों के जरिए छात्रों को असली प्रश्नपत्र देने का झांसा देकर लाखों रुपये वसूल रहा था। ऐसे में जांच एजेंसियों का मानना था कि केवल चैनल हटाने से समस्या खत्म नहीं होगी। इसी के बाद RE-NEET परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार ने टेलीग्राम की पहुंच पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है।
