Girl accident (Source. iStock)
Online Gaming Addiction: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न सिर्फ पूरे इलाके बल्कि देशभर के माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 12, 14 और 16 साल की तीन नाबालिग बहनों ने कथित तौर पर एक इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। बताया जा रहा है कि घर में ऑनलाइन गेम खेलने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद यह बेहद दुखद कदम उठाया गया। यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में है।
पुलिस के मुताबिक, तीनों बहनें पाखी, प्राची और विशिका ऑनलाइन गेमिंग की आदी हो चुकी थीं। परिवार को उनका यह जुनून ठीक नहीं लगता था और वे चाहते थे कि बेटियां मोबाइल और गेम से दूरी बनाएं। बताया जा रहा है कि कोरोना महामारी के दौरान स्कूल बंद होने और घर में ज्यादा समय बिताने की वजह से उन्हें ऑनलाइन गेम खेलने की आदत लग गई थी। वे जिस गेम को खेलती थीं, उसे ‘कोरियन लवर गेम’ बताया गया है।
जांच में सामने आया है कि तीनों लड़कियां नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रही थीं। उनका ज्यादातर वक्त मोबाइल और गेम्स में ही बीतता था। धीरे-धीरे यह शौक एक गंभीर लत में बदल गया। जब परिवार ने इस पर रोक लगाने की कोशिश की, तो घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इस कदम के पीछे की असली वजह जानने के लिए जांच जारी है।
यह दर्दनाक घटना गाजियाबाद की भारत सिटी रिहायशी टाउनशिप में बुधवार, 4 फरवरी की रात करीब 2 बजे हुई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों के शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर एक साथ इतना बड़ा फैसला लेने की नौबत कैसे आई।
आज के दौर में बच्चों और किशोरों में मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग की लत तेजी से बढ़ रही है। शुरुआत में यह महज मनोरंजन लगता है, लेकिन समय के साथ यह मानसिक और भावनात्मक समस्याओं को जन्म दे सकता है। नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई से दूरी और परिवार से कटाव इसके आम संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर तनाव का रूप ले सकता है।
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ऐसी घटनाओं से बचने के लिए माता-पिता को सख्ती के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए। बच्चों से खुलकर बात करें और उनकी भावनाओं को समझें। अचानक मोबाइल छीन लेना या डांटना कई बार हालात को और बिगाड़ सकता है। बेहतर है कि स्क्रीन टाइम तय किया जाए और धीरे-धीरे गेमिंग का समय कम किया जाए। बच्चों को खेलकूद, किताबों, म्यूजिक और आउटडोर एक्टिविटी की ओर प्रेरित करें। जरूरत पड़े तो काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट की मदद लेने में भी हिचक न करें। यह घटना एक चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की मानसिक सेहत पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है।