कम बिजली, ज्यादा दिमाग: AI के लिए आई इंसानी दिमाग जैसी नई चिप, बदल देगी टेक्नोलॉजी की दुनिया
AI New Chip: AI बीते कुछ दशकों में बेहद तेजी से आगे बढ़ा है। आज एआई का इस्तेमाल फोटो-वीडियो पहचान, आवाज को टेक्स्ट में बदलने, भाषा अनुवाद, मेडिकल जांच और चैटबॉट जैसे स्मार्ट सिस्टम में आम हो चुका है।
- Written By: सिमरन सिंह
AI New Chip (Source. Freepik)
Future AI Technology: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई बीते कुछ दशकों में बेहद तेजी से आगे बढ़ा है। आज एआई का इस्तेमाल फोटो-वीडियो पहचान, आवाज को टेक्स्ट में बदलने, भाषा अनुवाद, मेडिकल जांच और चैटबॉट जैसे स्मार्ट सिस्टम में आम हो चुका है। लेकिन इतनी तरक्की के साथ एक बड़ी समस्या भी सामने आई है एआई सिस्टम की भारी ऊर्जा खपत। बड़े-बड़े डेटा सेंटर और ताकतवर प्रोसेसर इतनी बिजली खर्च करते हैं कि लागत बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरण पर भी असर पड़ता है।
वैज्ञानिकों की बड़ी खोज
इसी चुनौती का समाधान तलाशते हुए हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, ईटीएच ज्यूरिख और यूनिवर्सिटी डी बौर्योइन यूरोप के वैज्ञानिकों ने एक अहम सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने ऐसे “रोशनी उत्सर्जित करने वाले कृत्रिम न्यूरॉन” विकसित किए हैं, जो पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के मुकाबले ज्यादा ऊर्जा-कुशल और भरोसेमंद साबित हो सकते हैं। यह खोज ‘ब्रेन-इंस्पायर्ड कंप्यूटिंग‘ की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
क्या हैं ये कृत्रिम न्यूरॉन
ये नए कृत्रिम न्यूरॉन ‘मेमरिस्टर’ नाम के नैनो-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर आधारित हैं। मेमरिस्टर की खास बात यह है कि यह पहले गुजर चुके विद्युत प्रवाह को याद रखता है और उसी हिसाब से अपना प्रतिरोध बदलता है। यह प्रक्रिया काफी हद तक इंसानी दिमाग की तंत्रिका कोशिकाओं जैसी है, जो अनुभव के आधार पर सीखती और प्रतिक्रिया देती हैं। जब इन कृत्रिम न्यूरॉन्स को पर्याप्त विद्युत संकेत मिलते हैं, तो वे रोशनी की बेहद सूक्ष्म पल्स उत्सर्जित करते हैं। यही रोशनी एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक जानकारी पहुंचाने का जरिया बनती है।
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बिना तारों के संवाद
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें भारी तारों और जटिल सर्किट की जरूरत नहीं पड़ती। रोशनी के माध्यम से डेटा ट्रांसफर होने के कारण ये न्यूरॉन फोटोनिक कनेक्शन से आपस में जुड़े रहते हैं। इससे वैज्ञानिक बेहद सघन और त्रि-आयामी (3D) न्यूरल नेटवर्क तैयार कर सकते हैं, जो कम जगह घेरते हैं और तेज़ी से काम करते हैं जो मौजूदा सिलिकॉन-आधारित तकनीक में आसान नहीं है।
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AI तकनीक की नई नींव
विशेषज्ञों का मानना है कि ये रोशनी-आधारित कृत्रिम न्यूरॉन भविष्य के एआई हार्डवेयर की नींव रख सकते हैं। ये कम बिजली में ज्यादा काम करेंगे, ज्यादा तेज और भरोसेमंद होंगे और मोबाइल डिवाइस, रोबोटिक्स व एज कंप्यूटिंग में आसानी से इस्तेमाल किए जा सकेंगे। यह खोज आने वाले वर्षों में एआई को ज्यादा टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल बना सकती है। यह अहम शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल “नेचर इलेक्ट्रॉनिक्स” में प्रकाशित हुआ है।
