Google पर अब नहीं चलेगी हर चाल, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से कंपनियों में बढ़ी टेंशन
Keyword Bidding की चर्चा जोरों से हो रही है। जिसकी वजह है दिल्ली हाईकोर्ट का हालिया फैसला। जानकारी के लिए बता दें कि अदालत ने भविष्य में आने वाले विज्ञापनो को लेकर एक बड़ा फैसला किया है।
- Written By: सिमरन सिंह
Keyword Bidding (Source. Freepik)
Keyword Bidding Or Trademark Infringement: डिजिटल विज्ञापन आज के समय में हर कारोबार से लेकर व्यक्ति की जरूर है और ऐसे में इस नई दुनिया में इन दिनों Keyword Bidding की चर्चा जोरों से हो रही है। जिसकी वजह है दिल्ली हाईकोर्ट का हालिया फैसला। जानकारी के लिए बता दें कि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अपने प्रतिस्पर्धी के ट्रेडमार्क वाले नाम पर विज्ञापन दिखाने के लिए बोली लगाती है तो इसे ट्रेडमार्क उल्लंघन माना जा सकता है। वहीं इस एक फैसले ने ऑनलाइन विज्ञापन उद्योग में नई बहस छेड़ दी है और कई कंपनियों की रणनीतियों पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिया है।
क्या होती है Keyword Bidding?
Keyword Bidding के बारे में बताए तो यह एक तरह का डिजिटल मार्केटिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसमें कंपनियां Google जैसे सर्च इंजन पर कुछ खास शब्दों या वाक्यांशों के लिए भुगतान करती हैं ताकि उनके विज्ञापन सर्च रिजल्ट्स में प्रमुख स्थान पर दिखाए जा सके। इस तरह की प्रक्रिया में पहले विज्ञापन देने वाला उन कीवर्ड्स को चुनता है जिससे उनके उत्पाद या सेवा को दिखाया जा सकें।
जिसके बाद विज्ञापन देने वाले को प्रति क्लिक की अधिकतम राशि तय करनी होती है। ऐसे में कोई यूजर उस शब्द को सर्च करता है तो Google एक ऑक्शन सिस्टम के जरिए तय करता है कि कौन सा विज्ञापन सबसे ऊपर आना चाहिए
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आखिर विवाद कहां से शुरू होता है?
कुछ समय पहले तक Keyword Bidding को एक वैध मार्केटिंग तकनीक माना जाता था लेकिन समस्या तब पैदा हुई जब कोई कंपनी अपने प्रतिद्वंद्वी के ट्रेडमार्क वाले नाम पर बोली लगाने लगी। उदाहरण के रूप में बताए तो यदि कोई व्यक्ति किसी खास ब्रांड की तलाश कर रहा हो और ठीक उसी समय किसी दूसरी कंपनी का विज्ञापन सामने आ जाए तो उपभोक्ता भ्रमित हो सकता है। ऐसी स्थितियों में, मूल ब्रांड यह दावा कर सकता है कि उसकी पहचान, प्रतिष्ठा और ग्राहक आधार का अनुचित रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है और यही वजह है कि दुनिया भर में इस तरह के मामलों को लेकर कानूनी विवाद लगातार सामने आ रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का क्या होगा असर?
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के बाद भारत में डिजिटल विज्ञापनों की निगरानी और अधिक सख्त हो सकती है। विशेष रूप से उन विज्ञापनों पर नजर रखी जाएगी जिनमें ट्रेडमार्क वाले शब्दों का उपयोग किया जाता है। वहीं कंपनियां अब अपने ब्रांड नामों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो सकती हैं। इतना ही नहीं इस फैसले के बाद प्रतिस्पर्धियों द्वारा ट्रेडमार्क के इस्तेमाल पर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बढ़ सकती है।
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Google और विज्ञापन उद्योग के लिए बड़ा संकेत
वहीं इस नए फैसले का असर सिर्फ कंपनियों पर नहीं होगा बल्कि पूरे डिजिटल विज्ञापन इकोसिस्टम पर देखा जाने वाला है। जिसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि Google को भारत में अपनी विज्ञापन नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है ताकि भविष्य में ऐसे विवादों और कानूनी चुनौतियों से बचा जा सके। ऐसे में आने वाले समय में यह फैसला तय कर सकता है कि ऑनलाइन विज्ञापन की दुनिया में प्रतिस्पर्धा किस हद तक स्वीकार्य है और ट्रेडमार्क अधिकारों की सुरक्षा को कितना महत्व दिया जाना चाहिए।
