अमेरिका से डील, टैरिफ कम, अब भारतीय ड्रोन कंपनियों की उड़ान होगी और ऊंची
Indian Drone Startups: भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील को दोनों देशों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस समझौते की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी है।
- Written By: सिमरन सिंह
drone (Source. Freepik)
India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील को दोनों देशों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इस समझौते की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। इस फैसले से कई सेक्टर्स को फायदा मिलने वाला है, लेकिन भारतीय ड्रोन इंडस्ट्री के लिए इसे एक गेम-चेंजर के तौर पर देखा जा रहा है।
ड्रोन सेक्टर के लिए क्यों खास है यह डील?
अब तक भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स ज्यादातर घरेलू बाजार तक सीमित थे, लेकिन इस ट्रेड डील के बाद हालात बदलने वाले हैं। कम टैरिफ और बेहतर सप्लाई चेन के चलते अब भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में मजबूती से एंट्री कर सकेंगी। इससे न सिर्फ एक्सपोर्ट बढ़ेगा, बल्कि ग्लोबल लेवल पर भारत की पहचान भी मजबूत होगी।
असेंबली नहीं, अब इनोवेशन की ओर भारत
डिफेंस से लेकर खेती और इंडस्ट्रियल यूज तक ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में भारत अब सिर्फ असेंबली करने वाला देश नहीं रहा। यह ट्रेड डील भारत को ग्लोबल ड्रोन हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, इससे चीन के ड्रोन सेक्टर के दबदबे को भी सीधी चुनौती मिलेगी।
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एक्सपोर्ट को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट
ड्रोन निर्माता कंपनी ideaForge के CFO विपुल जोशी का कहना है कि यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, “भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को करीब 18 प्रतिशत तक सीमित करने से दोनों देशों के बीच व्यापार में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी” जोशी का मानना है कि इससे सप्लाई चेन की रुकावटें और बढ़ती लागत कम होंगी, जिससे ideaForge जैसी कंपनियों को दुनिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी मार्केट में विस्तार करने का मौका मिलेगा।
डिजाइन और इंजीनियरिंग पर बढ़ेगा फोकस
IG Defence के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मेजर जनरल (रिटायर्ड) आर.सी. पाधी के अनुसार यह डील भारतीय कंपनियों के लिए एक उत्प्रेरक साबित होगी। उन्होंने कहा कि अब कंपनियां सिर्फ पार्ट्स जोड़ने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि फुल-स्पेक्ट्रम डिजाइन और इंजीनियरिंग पर ध्यान देंगी। इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रोपल्शन सिस्टम और सुरक्षित सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है।
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क्या भारत बनेगा ग्लोबल ड्रोन हब?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस डील की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नीतियां ग्लोबल सहयोग और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के बीच सही संतुलन बना पाती हैं या नहीं। अगर ऐसा हुआ, तो भारत डिफेंस, इंडस्ट्रियल और सिविल ड्रोन सेक्टर में एक भरोसेमंद वैश्विक केंद्र बन सकता है।
