चीन का अभेद्य Supercomputer हुआ हैक, मिसाइल-फाइटर जेट्स की सीक्रेट फाइलें लीक
China Supercomputer Hack: एडवांस टेक्नोलॉजी और मजबूत साइबर सुरक्षा के लिए मशहूर चीन अब खुद एक बड़े साइबर हमले का शिकार हो गया है। जिस देश को अपने अभेद्य सुपरकंप्यूटर सिस्टम पर गर्व था।
- Written By: सिमरन सिंह
China Supercomputer (Source. X)
Supercomputing Center Hack: दुनिया में अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी और मजबूत साइबर सुरक्षा के लिए मशहूर चीन अब खुद एक बड़े साइबर हमले का शिकार हो गया है। जिस देश को अपने “अभेद्य” सुपरकंप्यूटर सिस्टम पर गर्व था, वहीं अब हैकर्स ने सेंध लगाकर उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के नेशनल Supercomputer सेंटर में बड़ी साइबर चोरी हुई है, जहां से फाइटर जेट्स, मिसाइल डिजाइन और युद्ध सिमुलेशन से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी चुरा ली गई।
इतिहास की सबसे बड़ी डेटा चोरी?
इस साइबर अटैक को चीन के इतिहास की सबसे बड़ी डेटा लीक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, हैकर्स ने 10 पेटाबाइट से ज्यादा डेटा चोरी किया है। इसे आसान भाषा में समझें तो:
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- एक सामान्य लैपटॉप में करीब 1 टेराबाइट स्टोरेज होती है
- यानी हैकर्स ने लगभग 10,000 टेराबाइट डेटा चुरा लिया
यह घटना तिआनजिन स्थित Supercomputer सेंटर में हुई, जो 6,000 से ज्यादा संस्थानों, खासकर एयरोस्पेस और डिफेंस रिसर्च के लिए बेहद अहम माना जाता है।
हैकर्स ने कैसे किया हमला?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस बड़े हमले के लिए कोई अत्याधुनिक तकनीक नहीं अपनाई गई। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार:
- हैकर्स ने एक कंप्रोमाइज्ड VPN एंट्री पॉइंट के जरिए सिस्टम में प्रवेश किया
- डेटा को एक बार में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे हिस्सों में निकाला गया
- यह पूरा ऑपरेशन करीब 6 महीने तक चलता रहा
डेटा को टुकड़ों में निकालने की वजह से सुरक्षा सिस्टम इस चोरी को समय पर पकड़ नहीं सका।
इंटरनेट पर लीक हुआ संवेदनशील डेटा
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब फरवरी की शुरुआत में “FlamingChina” नाम के एक अकाउंट ने टेलीग्राम पर कुछ सैंपल फाइलें शेयर कीं। इन फाइलों में “टॉप सीक्रेट” मार्क वाले दस्तावेज, मिसाइल टेक्नोलॉजी और बमों से जुड़े डेटा शामिल थे।
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अब डेटा की हो रही बिक्री
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स अब इस चोरी किए गए डेटा को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि डेटा के छोटे प्रिव्यू के लिए हजारों डॉलर मांगे जा रहे हैं, जबकि पूरे डेटासेट की कीमत लाखों डॉलर रखी गई है, जिसे क्रिप्टोकरेंसी के जरिए खरीदा जा सकता है। हालांकि, इस मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है, लेकिन यह घटना वैश्विक साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ा अलर्ट मानी जा रही है।
क्यों है ये खबर अहम?
यह घटना साफ दिखाती है कि दुनिया की सबसे मजबूत मानी जाने वाली साइबर सुरक्षा भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। ऐसे में अब हर देश के लिए अपने डिजिटल सिस्टम को और मजबूत बनाना बेहद जरूरी हो गया है।
