Ranvir Sachdeva (Source. X)
Child Prodigy AI: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में जब दुनिया के दिग्गज टेक CEO, उद्योगपति और नीति-निर्माता मौजूद थे, तब सबसे ज्यादा तालियां एक 8 साल के बच्चे के लिए बजीं। रणवीर सचदेवा ने सबसे कम उम्र के कीनोट स्पीकर के रूप में मंच संभाला और पूरे हॉल को हैरान कर दिया।
2017 में जन्मे रणवीर सचदेवा को टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बाल प्रतिभा माना जाता है। इतनी कम उम्र में उन्होंने खुद को टेक्नोलॉजिस्ट, ग्लोबल ऑथर और TEDx स्पीकर के रूप में स्थापित कर लिया है। सिर्फ तीन साल की उम्र में वे दिमाग में ही संख्याओं के स्क्वायर और क्यूब निकाल लेते थे। यही उनकी असाधारण गणितीय क्षमता की पहली झलक थी।
रणवीर को स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी, स्पेस एक्सप्लोरेशन, कोडिंग और AI जैसे क्षेत्रों में गहरी समझ है। उनके पास Google का Responsible AI सर्टिफिकेशन भी है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपना खुद का AI आधारित चैटबॉट भी तैयार किया है, जो APIs के जरिए अलग-अलग एप्लिकेशन से जुड़ सकता है। वे “Are You Born With AI?” नामक किताब के लेखक भी हैं, जो अमेज़न पर दुनियाभर में उपलब्ध है।
India AI Impact Summit के दौरान रणवीर ने Sundar Pichai और Sam Altman जैसे वैश्विक टेक लीडर्स से मुलाकात की। उन्होंने इन मुलाकातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा कीं।
रणवीर के पास Indian Institute of Technology Delhi से रोबोटिक्स सर्टिफिकेशन है। मात्र चार साल की उम्र में उनका Mars Mission पर बना प्रोजेक्ट NASA की वेबसाइट पर फीचर हुआ। पांच साल की उम्र में वे दुनिया के सबसे कम उम्र के Apple Swift प्रोग्रामर बने और उन्हें Apple CEO Tim Cook ने कैलिफोर्निया स्थित मुख्यालय में Worldwide Developers Conference में आमंत्रित किया।
ये भी पढ़े: अब आधार करेगा खुद फोन, धोखाधड़ी रुकेगी, करोड़ों लोगों की टेंशन खत्म? जानिए क्या है Aadhaar AI Mitra
सितंबर 2024 में, छह साल की उम्र में रणवीर को United Nations के 79वें जनरल असेंबली सत्र में शामिल होने का न्योता मिला। इसके बाद 2025 में उन्होंने जिनेवा में आयोजित AI for Good Global Summit में 10,000 से अधिक लोगों के सामने 20 मिनट का भाषण दिया। सात साल की उम्र में उन्होंने “Godfather of AI” कहे जाने वाले नोबेल और ट्यूरिंग अवॉर्ड विजेता Geoffrey Hinton के साथ मंच साझा किया।
रणवीर सचदेवा की कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। यह नई पीढ़ी का आत्मविश्वास है, जो भारत को AI की दुनिया में नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।