मलेशिया मास्टर्स 2025 में किदांबी श्रीकांत की फाइनल में एंट्री, 2019 के बाद पहली बार खेलेंगे बीडब्ल्यूएफ का खिताबी मुकाबला

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने मलेशिया मास्टर्स सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट में जापान के युशी टनाका पर सीधे गेम में जीत दर्ज कर छह साल में पहली बार बीडब्ल्यूएफ टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया।
मलेशिया मास्टर्स 2025 में किदांबी श्रीकांत की फाइनल में एंट्री, 2019 के बाद पहली बार खेलेंगे बीडब्ल्यूएफ का खिताबी मुकाबला
किदांबी श्रीकांत (फोटो-सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली: भारतीय स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने मलेशिया मास्टर्स 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने जापान के युशी टनाका को सीधे गेमों में 21-18 और 24-22 से हराया। यह जीत उनके लिए खास है क्योंकि श्रीकांत करीब छह साल बाद किसी बीडब्ल्यूएफ टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे हैं।

यह जीत इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि श्रीकांत लगभग छह साल बाद किसी बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल में पहुंचे हैं। आखिरी बार वह 2019 में इंडिया ओपन के फाइनल में खेले थे। इससे पहले 2017 में उन्होंने एक साल में चार बड़े खिताब जीतकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था और विश्व रैंकिंग में नंबर एक तक पहुंचे थे।

चोट के बाद दमदार वापसी

पिछले कुछ वर्षों में श्रीकांत का करियर चोटों, फिटनेस की समस्याओं और टूर्नामेंटों की कमी से प्रभावित रहा। उन्हें बार-बार टखने की चोटें लगीं, जिससे उनकी लगातार प्रदर्शन करने की क्षमता पर असर पड़ा। कोविड-19 महामारी के कारण कई टूर्नामेंट रद्द हो गए, जिससे वह टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर सके।

नंबर-1 से 65 पर पहुंचे श्रीकांत

पिछले कुछ सालों में उनकी रैंकिंग गिरते-गिरते 65वें नंबर तक पहुंच गई है। कभी दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी रहे श्रीकांत, आज 65वें नंबर पर हैं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और फिर से वापसी की कोशिश की। श्रीकांत ने बताया कि उन्होंने पिछले कुछ महीनों में ट्रेनिंग और फिटनेस पर पूरी तरह ध्यान दिया और अब नतीजा भी दिखने लगा है।

श्रीकांत ने जीत के बाद कहा कि मैं बहुत खुश हूं। यह जीत मेरे लिए बहुत मायने रखती है। मैं लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहा था। अब मैं फिर से अच्छा खेल रहा हूं और शारीरिक रूप से भी फिट महसूस कर रहा हूं।

फाइनल में सबकी निगाहें श्रीकांत पर

इस जीत के बाद श्रीकांत एक बार फिर भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। अगर वह फाइनल मुकाबले में भी शानदार प्रदर्शन करते हैं, तो यह उनकी दूसरी पारी की मजबूत शुरुआत साबित हो सकती है। उनकी यह वापसी दिखाती है कि अनुभव, धैर्य और मेहनत के दम पर कोई भी खिलाड़ी फिर से शिखर तक पहुंच सकता है।

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