गुकेश बने सबसे युवा शतरंज चैंपियन, वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब किया अपने नाम
भारत के 18 साल के ग्रैंडमास्टर डी गुकेश 14वीं और अंतिम बाजी में चीन के डिंग लिरेन को हराकर सबसे युवा शतरंज विश्व चैंपियन बने। उन्होंने 14वीं बाजी में काले मोहरे से खेलते हुए खिताब अपने नाम किया।
- Written By: उज्जवल सिन्हा
गुकेश विश्व चेस चैंपियनशिप जीतने के बाद (फोटो-सोशल मीडिया)
स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने रोमांचक मुकाबले में 14वीं और आखिरी बाजी में गत चैंपियन चीन के डिंग लिरेन को हराकर 18 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बने। गुकेश ने 14 बाजी के इस मुकाबले की आखिरी क्लासिकल बाजी जीतकर लिरेन के 6.5 के मुकाबले जरूरी 7.5 अंक के साथ खिताब जीता। यह गेम अंतिम समय तक ड्रॉ होते दिखाई दे रहा था कि लेकिन गुकेश ने अंत समय पर ऐसी चाल चली की बाजी उनके नाम हो गई।
इसके साथ गुकेश ने वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के खिताब पर कब्जा जमाया। गुकेश ने 14वीं बाजी चलने के बाद जब जीत सुनिश्चित हो गई तब गुकेश भावुक हो गए। या यूं कहें तो खुशी के आंसू नहीं रोक सके। उन्होंने इस जीत के लिए भगवान का शुक्रिया भी अदा किया। जो आप वीडियो में भी देख सकते हैं।
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The emotional moment that 18-year-old Gukesh Dommaraju became the 18th world chess champion 🥲🏆 pic.twitter.com/jRIZrYeyCF — Chess.com (@chesscom) December 12, 2024
गुकेश ने विश्व शतरंज चैंपियनशिप जीतने के बाद कहा कि मैं पिछले 10 वर्षों से इस पल का सपना देख रहा था। जब यह पल आया तो मैं थोड़ा भावुक हो गया। मुझे जीत की उम्मीद नहीं थी। लेकिन फिर मुझे आगे बढ़ाने का मौका मिला। गुकेश ने अपने प्रतिद्वंद्वी लिरेन के बारे में कहा कि मेरे लिए डिंग असली विश्व चैंपियन हैं। मुझे डिंग और उनकी टीम के लिए खेद है। मैं अपने प्रतिद्वंद्वी को धन्यवाद देना चाहूंगा। उन्होंने कमाल का प्रदर्शन किया है।
गुकेश की खिताबी जीत से पहले रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन थे जिन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर 22 साल की उम्र में खिताब जीता था। गुकेश इस साल की शुरुआत में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद विश्व खिताब के लिए चुनौती पेश करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। वह दिग्गज विश्वनाथन आनंद के बाद वैश्विक खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं। पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद ने अपना आखिरी खिताब 2013 में जीता था।
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