चंबल से लेकर टीम इंडिया तक…पापा ने देखी कुंडली फिर तय हुआ भविष्य, यह है वैष्णवी शर्मा की कहानी
Who is Vaishnavi Sharma: युवा भारतीय गेंदबाज वैष्णवी शर्मा ने विशाखापत्तनम में श्रीलंका के खिलाफ टी-20 से इंटरनेशनल डेब्यू किया. किफायती गेंदबाजी कर उन्होंने टीम मैनेजमेंट के भरोसे को सही साबित किया।
- Written By: संजय सिंह बिष्ट
हरमनप्रीत कौर के साथ वैष्णवी शर्मा (फोटो- सोशल मीडिया)
Vaishnavi Sharma’s Inspiring Story: सीनियर इंडियन वुमेन क्रिकेट टीम में डेब्यू करना वैष्णवी शर्मा के लिए किसी सपने के सच होने जैसा रहा। अंडर-19 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर खेलने का मौका मिला। 20 वर्षीय लेफ्ट आर्म स्पिनर ने श्रीलंका के खिलाफ अपने पहले ही मुकाबले में सधी हुई गेंदबाजी कर सभी को प्रभावित किया और चयनकर्ताओं के भरोसे को सही साबित किया।
डेब्यू मैच ठीकठार रहा
अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में वैष्णवी शर्मा ने जबरदस्त अनुशासन दिखाया। उन्होंने 4 ओवर में महज 16 रन खर्च किए और उनकी इकॉनमी रेट 4 की रही। भले ही उन्हें विकेट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने रन रोकने का काम बखूबी निभाया। उनकी गेंदबाजी में परिपक्वता साफ नजर आई, जो उनके अनुभव और आत्मविश्वास को दर्शाती है।
What’s more nerve-racking than making your #TeamIndia Debut 🤔 Addressing the post-match press conference 😁 Presenting PC tales ft. Vaishnavi Sharma 🎙️#INDvSL | @IDFCFIRSTBank pic.twitter.com/9bqePD9yPO — BCCI Women (@BCCIWomen) December 22, 2025
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संघर्ष के बाद मिली पहचान
वुमेन प्रीमियर लीग में अनसोल्ड रहने के बावजूद वैष्णवी शर्मा ने हार नहीं मानी। WPL में मौका न मिलने के बाद भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट और जूनियर लेवल पर लगातार अच्छा प्रदर्शन जारी रखा। इसका ही नतीजा रहा कि उन्हें भारतीय टीम की कैप पहनने का मौका मिला। यह कहानी बताती है कि टैलेंट और मेहनत कभी नजरअंदाज नहीं होती।
अंडर-19 वर्ल्ड कप बना टर्निंग पॉइंट
अंडर-19 वुमेन टी-20 वर्ल्ड कप वैष्णवी शर्मा के करियर का सबसे अहम पड़ाव साबित हुआ। इस टूर्नामेंट में उन्होंने कुल 17 विकेट झटके और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रहीं। उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें भविष्य की संभावित भारतीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया।
हरमनप्रीत कौर का भरोसा
जब टीम इंडिया की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने वैष्णवी शर्मा को डेब्यू कैप सौंपी, तो यह भरोसे का बड़ा संकेत था। कप्तान की नजरों में इस युवा खिलाड़ी को लेकर साफ विश्वास दिखा। अगर वैष्णवी इसी तरह इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रहीं, तो उन्हें नियमित टीम का हिस्सा बनने से कोई नहीं रोक सकता।
पिता ने कुंडली देखकर किया बड़ा फैसला
ग्वालियर की रहने वाली वैष्णवी शर्मा चंबल इलाके से टीम इंडिया तक पहुंचने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं। उनके पिता जीवाजी यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोलॉजी के प्रोफेसर हैं। उन्होंने बेटी की कुंडली देखकर क्रिकेटर बनाने का फैसला लिया और हर कदम पर उसका साथ दिया। आज वैष्णवी की सफलता नॉन-मेट्रो शहरों के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
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वैष्णवी शर्मा की कहानी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। अंडर-19 क्रिकेट से लेकर सीनियर टीम तक का उनका सफर यह साबित करता है कि सच्ची लगन हो, तो मंजिल जरूर मिलती है। आने वाले समय में वह भारतीय महिला क्रिकेट की मजबूत कड़ी बन सकती हैं।
