श्रीलंका क्रिकेट खिलाड़ी (फोटो- सोशल मीडिया)
Sri Lanka Cricket Board Statement: श्रीलंका क्रिकेट ने अपने खिलाड़ियों के लिए एक सख्त नियम लागू करते हुए साफ कर दिया है कि अब किसी भी फ्रेंचाइजी लीग में खेलने के लिए उन्हें पहले फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा। बिना फिटनेस टेस्ट में सफल हुए किसी खिलाड़ी को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) नहीं दिया जाएगा।
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने कहा कि “अभी एसएलसी राष्ट्रीय अनुबंध वाले सभी खिलाड़ियों के लिए आठ हफ़्ते का एक खास फिजिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रहा है। इस पहल का मकसद, आने वाले अंतरराष्ट्रीय मैचों की तैयारी के लिए खिलाड़ियों की फिजिकल परफॉर्मेंस के स्तर को बेहतर बनाना है। इस प्रोग्राम के साथ-साथ, खिलाड़ी अनिवार्य फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट भी दे रहे हैं। यह एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका पालन खिलाड़ियों की फिटनेस के स्तर को जांचने के लिए किया जाता है। केवल वही खिलाड़ी, जो फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट के तय मानकों को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, उन्हें ही चल रहे घरेलू टूर्नामेंट में खेलने की मंजूरी दी जाएगी। साथ ही, उन्हें आईपीएल 2026 में हिस्सा लेने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी दिया जाएगा।”
इस फैसले का सीधा प्रभाव इंडियन प्रीमियर लीग 2026 पर देखने को मिलेगा। आगामी सीजन में वानिंदु हसरंगा (लखनऊ सुपर जायंट्स), नुवान तुषारा (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु), मथीशा पथिराना (कोलकाता नाइट राइडर्स) और ईशन मलिंगा (सनराइजर्स हैदराबाद) जैसे खिलाड़ी शामिल होने वाले हैं। हालांकि इन खिलाड़ियों की भागीदारी अब उनके फिटनेस टेस्ट के परिणाम पर निर्भर करेगी।
दूसरी ओर, दुष्मंथा चमीरा, पथुम निसांका और कामिंदु मेंडिस ने फिजिकल परफॉर्मेंस टेस्ट पास कर लिया है। इसके बाद उन्हें आईपीएल में खेलने की अनुमति मिल चुकी है। बोर्ड के अनुसार, जिन खिलाड़ियों ने मानकों को पूरा कर लिया है, उन्हें एनओसी जारी कर दी गई है।
वानिंदु हसरंगा, ईशन मलिंगा और मथीशा पथिराना जैसे खिलाड़ी अभी चोट से उबर रहे हैं और रिहेबिलिटेशन प्रक्रिया में हैं। ऐसे में उन्हें अभी फिटनेस टेस्ट देना बाकी है। पथिराना के बारे में माना जा रहा है कि वह आईपीएल सीजन की शुरुआत के कुछ मैच मिस कर सकते हैं और अप्रैल के मध्य तक टीम से जुड़ पाएंगे।
यह कदम नई चयन समिति और खेल मंत्रालय की पहल का हिस्सा माना जा रहा है। श्रीलंका की टीम को मई के अंत तक कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेलना है, ऐसे में इस समय को खिलाड़ियों की फिटनेस सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस टेस्ट में दो किलोमीटर की दौड़ समेत कई शारीरिक मानक शामिल हैं।
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बोर्ड ने खिलाड़ियों के लिए आठ हफ्तों का विशेष फिटनेस प्रोग्राम भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाना और उन्हें आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए तैयार करना है।