सचिन तेंदुलकर ने 15 साल पूराना वादा निभाया, महान बल्लेबाज से सीखें सच्ची दोस्ती की कहानी

Irani Trophy: क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर संन्यास के बाद भी सुर्खियों में रहते हैं। 24 साल के करियर में रिकॉर्ड बनाने के साथ उनकी इंसानियत का एक किस्सा सामने आया, जिसने फिर फैंस का दिल जीता।
सचिन तेंदुलकर ने 15 साल पूराना वादा निभाया, महान बल्लेबाज से सीखें सच्ची दोस्ती की कहानी
सचिन तेंदुलकर (फोटो- सोशल मीडिया)
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Sachin Tendulkar: क्रिकेट जगत में मास्टर ब्लास्टर के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में अनगिनत रिकॉर्ड बनाए और लाखों फैन्स का दिल जीता। संन्यास के बाद भी उनके किस्से और अनुभव क्रिकेट प्रेमियों को प्रेरित करते रहते हैं। हाल ही में सचिन ने अपने करियर से जुड़ा एक ऐसा पुराना वाकया साझा किया, जिसने उनके चयन की कहानी को और भी खास बना दिया।

टूटे हाथ से बल्लेबाजी और सचिन का चयन

यह घटना ईरानी कप की है, जब युवा सचिन तेंदुलकर रेस्ट ऑफ इंडिया की ओर से खेल रहे थे। उस मुकाबले में सचिन 85 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, लेकिन टीम के 9 विकेट गिर चुके थे। इसी मुश्किल घड़ी में गुरशरण सिंह टूटे हाथ के बावजूद बल्लेबाजी करने उतरे। उनका मैदान पर आना तय नहीं था, लेकिन उन्होंने टीम के हित को प्राथमिकता दी।

गुरशरण सिंह की साहसिक भूमिका

सचिन के अनुसार, गुरशरण सिंह ने अपने जज्बे और त्याग से उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया। 9 दिसंबर को आयोजित एजियास फेडरल लाइफ इंश्योरेंस इवेंट में सचिन ने इस पल को याद करते हुए बताया कि वही मुकाबला भारतीय टीम के लिए उनका ट्रायल मैच था। गुरशरण ने चोट के बावजूद बैटिंग कर सचिन को अपना शतक पूरा करने का मौका दिया, जिसके बाद उनका चयन भारतीय टीम में हो गया।

सचिन के दिल को छू गया था गुरशरण का जज्बा

सचिन ने कहा कि गुरशरण का मैदान पर उतरना उनके लिए बेहद भावुक पल था। टूटे हाथ के साथ बल्लेबाजी करना आसान नहीं होता, लेकिन गुरशरण के इरादे और जज्बे ने उन्हें गहरे तक प्रभावित किया। सचिन के मुताबिक, यही वह पल था जिसने उन्हें गुरशरण का हमेशा आभारी बना दिया।

15 साल बाद निभाया गया वादा

सचिन तेंदुलकर ने बताया कि उन्होंने न्यूजीलैंड दौरे (1990) के दौरान गुरशरण सिंह से एक वादा किया था। उस दौर में रिटायर्ड खिलाड़ियों के लिए बेनिफिट मैच आयोजित किए जाते थे। सचिन ने गुरशरण से कहा था कि जब भी उन्हें बेनिफिट मैच मिलेगा, वह जरूर खेलने आएंगे।

निभाया दोस्ती का फर्ज

करीब 15 साल बाद जब गुरशरण सिंह ने अपना बेनिफिट मैच आयोजित किया, तो सचिन ने अपना वादा निभाया। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि इतने साल बाद भी उस पल को निभाना उनके लिए गर्व की बात थी। सचिन के मुताबिक, यह सिर्फ एक मैच नहीं बल्कि उस इंसान के प्रति सम्मान था, जिसने उनके करियर की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई।

क्रिकेट से आगे इंसानियत की मिसाल

सचिन तेंदुलकर का यह किस्सा बताता है कि क्रिकेट सिर्फ रिकॉर्ड्स का खेल नहीं, बल्कि इंसानियत, भरोसे और वादों को निभाने की कहानी भी है। गुरशरण सिंह और सचिन की यह कहानी आज भी खिलाड़ियों और फैन्स के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

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