Birthday Special: क्रिकेट इतिहास का वो अनोखा ऑलराउंडर, जिसके नाम बैटिंग-बॉलिंग दोनों में दर्ज है खास रिकॉर्ड
Manoj Prabhakar: मनोज प्रभाकर ने गेंद और बल्ले दोनों से भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार बल्लेबाजी और गेंदबाजी की शुरुआत का अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है।
- Written By: संजय बिष्ट
टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी मनोज प्रभाकर (फोटो- सोशल मीडिया)
Manoj Prabhakar Birthday Special: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मनोज प्रभाकर का नाम एक बेहतरीन तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में लिया जाता है। वह नई गेंद से गेंदबाजी करने के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी के लिए भी जाने जाते थे। खास बात यह रही कि कई मौकों पर उन्होंने टीम इंडिया के लिए पारी की शुरुआत भी की, जो उन्हें एक खास खिलाड़ी बनाती है।
करियर की शुरुआत और शुरुआती सफर
मनोज प्रभाकर का जन्म 15 अप्रैल 1963 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुआ था। दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज और बल्लेबाज प्रभाकर ने 1984 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। उन्होंने 8 अप्रैल 1984 को श्रीलंका के खिलाफ वनडे और 12 दिसंबर 1984 को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट में डेब्यू किया। इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टीम का अहम हिस्सा बने रहे और 1996 तक देश का प्रतिनिधित्व किया।
ऑलराउंड प्रदर्शन से बनाई पहचान
प्रभाकर ने अपने करियर में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया। उन्होंने 39 टेस्ट मैचों में 96 विकेट झटके और 1600 रन बनाए, जिसमें एक शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं वनडे क्रिकेट में उन्होंने 130 मैचों में 157 विकेट लिए और 1858 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 11 अर्धशतक शामिल रहे। गेंद और बल्ले दोनों से उनका योगदान टीम के लिए अहम रहा।
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विश्व रिकॉर्ड ने बनाया खास
मनोज प्रभाकर के नाम एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों की शुरुआत करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने वनडे में 45 बार और टेस्ट में 20 बार यह उपलब्धि हासिल की। उनकी स्विंग गेंदबाजी, खासकर आउटस्विंगर और धीमी गेंद, उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती थी।
घरेलू क्रिकेट और उपलब्धियां
घरेलू क्रिकेट में भी प्रभाकर का प्रदर्शन शानदार रहा। दिल्ली के लिए खेलते हुए उन्होंने 154 प्रथम श्रेणी मैचों में 385 विकेट और 7469 रन बनाए। वहीं लिस्ट ए क्रिकेट में 214 मैचों में 269 विकेट लेने के साथ 4118 रन भी बनाए। इसके अलावा वह 1985 वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट और एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा भी रहे।
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1996 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद प्रभाकर कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। उन्होंने दिल्ली और राजस्थान टीम के साथ-साथ अफगानिस्तान और नेपाल की टीमों के साथ भी काम किया। हालांकि उनके करियर में विवाद भी जुड़े रहे, जिसमें मैच फिक्सिंग के आरोप और कोचिंग कार्यकाल के दौरान मतभेद शामिल हैं। फिलहाल वह क्रिकेट से दूर अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं।
