गौतम गंभीर (फोटो-सोशल मीडिया)
स्पोर्ट्स डेस्क: चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल भारत ने 4 विकेटों से जीता। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने तीसरी बार चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब पर कब्जा जमाया। खिताब जीतते ही भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी इतिहास रच दिया। गौतम गंभीर बतौर खिलाड़ी और कोच के रूप में ट्रॉफी जीतने वालों की लिस्ट में शामिल हो गए।
न्यूजीलैंड ने इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रन बनाए। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने 6 विकेट खोकर मुकाबले को जीत लिया। इस जीत में रोहित शर्मा का अहम योगदान रहा। उन्होंने सबसे ज्यादा 76 रनों की पारी खेली। ट्रॉफी जीतते ही गौतम गंभीर ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय बने। इससे पहले राहुल द्रविड़ ने यह कारनामा पिछले साल किया था।
गौतम गंभीर बतौर कोच और खिलाड़ी के तौर पर ICC टूर्नामेंट जीतने वाले केवल पांचवें व्यक्ति बन गए हैं। 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप चैंपियन, भारत के पूर्व साथी खिलाड़ी राहुल द्रविड़, ऑस्ट्रेलियाई डैरेन लेहमैन और ज्योफ मार्श और दक्षिण अफ्रीकी गैरी कर्स्टन के साथ खास लिस्ट में शामिल हो गए हैं।
द्रविड़ ने पिछले साल मुख्य कोच के तौर पर भारत को 2024 टी20 विश्व कप खिताब दिलाया था। एक खिलाड़ी के तौर पर द्रविड़ उस भारतीय टीम का हिस्सा थे, जिसे 2002 के चैंपियंस ट्रॉफी में श्रीलंका के साथ संयुक्त विजेता घोषित किया गया था।
लेहमैन 2015 विश्व कप जीत में ऑस्ट्रेलिया के कोच थे। उन्होंने कंगारू टीम के साथ एक खिलाड़ी के रूप में 2003 और 1999 में दो विश्व कप भी जीते। शॉन और मिचेल के पिता ज्योफ मार्श ने 1999 का विश्व कप मुख्य कोच के रूप में जीता था, जबकि 1987 का विश्व कप उन्होंने खिलाड़ी के रूप में जीता था।
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कर्स्टन को भारत में बहुत पसंद किया जाता है क्योंकि उन्होंने टीम की 2011 विश्व कप जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में 1998 चैंपियंस ट्रॉफी (तब इसे ICC नॉकआउट टूर्नामेंट कहा जाता था) भी जीती थी।
इस टूर्नामेंट से पहले गंभीर पर बहुत दबाव था। उनके नेतृत्व में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला हारी थी, पहली बार घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड से टेस्ट में हार का सामना किया था और फिर ऑस्ट्रेलिया से 2024-25 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भी हार गया था। उसके बाद भारतीय टीम ने वनडे में इंग्लैंड को क्लीन स्वीप किया। उसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी में बिना एक भी मैच हारे फाइनल का खिताब अपने नाम किया।