बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर संस्पेंशन का खतरा (फोटो- सोशल मीडिया)
Bangladesh Cricket Board Election Row: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है। आईसीसी से सस्पेंड होने की आशंका बढ़ गई है, जिसकी मुख्य वजह बोर्ड चुनावों में कथित अनियमितताओं की जांच है। बांग्लादेश की नई सरकार ने चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर, धांधली और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं।
आईसीसी के नियमों के अनुसार किसी भी क्रिकेट बोर्ड में सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं किया जाता। ऐसे में यदि यह जांच सरकारी हस्तक्षेप मानी गई, तो बीसीबी पर निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि सरकार ने इस जोखिम को देखते हुए अब आईसीसी से बातचीत करने का फैसला किया है।
बांग्लादेश के खेल मंत्री अमीनुल हक ने स्पष्ट किया है कि वह अंतिम निर्णय लेने से पहले आईसीसी से सलाह लेंगे। इसके अलावा उन्होंने एक और जांच समिति बनाने की घोषणा की है, जो यह पता लगाएगी कि इस साल भारत और श्रीलंका में हुए पुरुष टी20 विश्व कप में बांग्लादेश क्यों हिस्सा नहीं ले पाया।
11 मार्च को खेल मंत्रालय ने बीसीबी चुनावों में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एक समिति बनाई थी। इस पर बीसीबी ने कड़ा विरोध जताया और इसे सरकारी दखल करार दिया। बोर्ड का कहना है कि यह कदम उसके स्वतंत्र कामकाज में हस्तक्षेप के बराबर है। खेल मंत्री ने कहा कि पांच सदस्यीय समिति 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस पूरे मामले में पिछली सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। खेल मंत्री अनीमुल हक ने कहा कि “हम सब जानते हैं कि पिछले साल बीसीबी चुनावों में हमारी पिछली सरकार का सीधा हस्तक्षेप था। मैंने कई बार इस बारे में बात की है। ढाका के क्लबों और जिलों से मिले आरोपों के बाद हमने जांच समिति बनाई है। मैं उनकी रिपोर्ट पढुंगा, लेकिन अगला क़दम आईसीसी से बात करने के बाद ही उठाऊंगा।”
बीसीबी चुनाव के दौरान कई गंभीर आरोप सामने आए थे। तमीम इकबाल और ढाका के कई क्लब अधिकारियों ने चुनाव में हेरफेर का आरोप लगाया था। इसके अलावा बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर भी चुनाव से पहले हस्तक्षेप के आरोप लगे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव से पहले काउंसिलरों के नाम बदलने और नामांकन की तारीख बढ़ाने जैसे फैसलों पर भी सवाल उठाए गए थे।
जांच को लेकर खेल मंत्री ने विस्तृत जानकारी भी दी है। हक ने कहा- “जांच समिति बीसीबी के चुनाव आयुक्तों, मौजूदा बोर्ड अध्यक्ष, बीसीबी निदेशकों और सीईओ से बात करेगी। यह उन जिला प्रशासकों से भी संपर्क करेगी जिन्होंने बीसीबी काउंसिलरों का नामांकन किया था। आरोप है कि कई जिला प्रशासकों ने एक काउंसिलर का नाम भेजने के बाद, एक पत्र मिलने पर नया नाम भेज दिया था। मेरा मानना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
बांग्लादेश के टी20 विश्व कप में हिस्सा न लेने के फैसले की भी जांच होगी। बोर्ड ने उस समय सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत जाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आईसीसी ने उसकी जगह स्कॉटलैंड को मौका दिया। इस फैसले पर भी सवाल उठे हैं और सरकार अब इसकी पूरी समीक्षा करना चाहती है।
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उन्होंने कहा कि “हम यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि हम विश्व कप में क्यों नहीं गए। हमें समझना होगा कि हमारी खेल कूटनीति कहां कमजोर पड़ी। इस विषय पर ईद के बाद एक जांच समिति बनाई जाएगी। हमें अपनी खेल कूटनीति को मजबूत करना होगा ताकि भविष्य में यह ग़लती दोबारा न हो।”