जीरो शैडो डे (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, 26 मई को जीरो शैडो डे रहेगा।हमारा मतलब है कि इस दिन किसी की परछाई या छाया नजर नहीं आएगी।वह आपके पैरों के नीचे होगी।इसे आप प्रकृति का चमत्कार मान सकते हैं।वैसे विदर्भ के अलग-अलग ठिकानों पर 20 से 28 मई तक जीरो शैडो डे रहेगा।महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर में 26 मई को दोपहर 12.10 बजे किसी भी व्यक्ति की छाया जमीन पर नहीं पड़ेगी।प्रति वर्ष 2 बार ऐसी स्थिति आती है जब सूर्य देव उत्तरायण में और फिर दक्षिणायन में रहते हैं।’
हमने कहा, ‘किसी छाया या माया के चक्कर में मत पड़िए।उसमें उलझेंगे तो बाहर नहीं निकल पाएंगे।जब सूर्य और चंद्रमा एक सीध में रहते हैं तो चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है।इसे ग्रहण कहा जाता है।चंद्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण, सब छाया का खेल है।जब दुनिया में दूरबीन का आविष्कार नहीं हुआ था तब भी हजारों वर्षों पहले हमारे ज्योतिषी बता देते थे कि ग्रहण कब पड़नेवाला है.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, किसी मंत्री या वीवीआईपी के साथ सिक्योरिटी वाले छाया की तरह लगे रहते हैं।छोटे-मोटे नेता के चमचे भी उसकी शैडो बने रहते हैं।सुनील दत्त और आशा पारेख की एक फिल्म आई थी जिसका नाम था- छाया! इसमें गीत था- इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ा कि मैं एक बादल आवारा ’
हमने कहा, ‘पुराणों के अनुसार सूर्य देव की 2 पत्नियां थीं- संध्या और छाया।जब संध्या सूर्य के ताप से घबरा गई तो उसने अपनी छाया को वहां छोड़ दिया जो उसके जैसी ही दिखती थी।छाया से शनि का जन्म हुआ जबकि संध्या की संतानें यम, यमुना, ताप्ती, वैवस्वत मनु थे।रामायण के अरण्य कांड में उल्लेख है कि वनवास के 13 वर्ष बीतने के बाद भगवान राम ने सीता से कहा कि अब हम रावण को मारने के लिए लीला करेंगे।तुम अग्नि में समा जाओ और अपनी छाया को यहां छोड़ दो।
रावण जिस सीता का हरण करके ले गया वह माया सीता थीं।रावण वध के बाद जब सीता की अग्नि परीक्षा हुई तो अग्नि से वास्तविक सीता निकल कर सामने आ गईं।विष्णु और लक्ष्मी के अवतार राम-सीता की यह लीला रावण समझ ही नहीं पाया और मारा गया।इसलिए कभी छाया या माया के पीछे दौड़ना नहीं चाहिए।वह कभी हाथ नहीं आती।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा