नवभारत संपादकीय: अब बंगाल चुनाव के दूसरे चरण पर नजरें, नतीजे तय करेंगे 2029 की दिल्ली का रास्ता?
Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव के नतीजों पर पूरे देश की नज़र है। क्या ममता बनर्जी फिर से बीजेपी के विजय रथ को रोक पाएंगी या इस बार दिल्ली की राह आसान होगी? जानिए सत्ता का पूरा गणित।
- Written By: आकाश मसने
ममता बनर्जी (डिजाइन फोटो)
Bengal Politics TMC Vs BJP: यद्यपि बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान अभी बाकी है, लेकिन देशवासियों का ध्यान 4 मई की ओर लगा है, जब चुनावी नतीजे सामने आएंगे। लोग यह भी मान रहे हैं कि यदि बीजेपी भरसक प्रयास के बावजूद बंगाल में हार गई तो ममता बनर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस का अपवाद छोड़कर इंडिया गठबंधन के सभी घटक दलों और क्षेत्रीय पार्टियों को दिल्ली में मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक होने का अवसर मिलेगा।
दिल्ली की बात इसलिए की जा रही है क्योंकि ममता बनर्जी ने कहा है कि बंगाल का चुनाव तो हम जीत ही लेंगे लेकिन अब दिल्ली में मोदी सरकार से मुकाबला करना है। कितने ही लोग इसे ममता का बड़बोलापन मानेंगे, लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि बीजेपी को उनसे निपटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा है।
SIR के जरिए 91 लाख लोगों को मतदान से वंचित करने, केंद्रीय एजेंसियों को सक्रिय करने के अलावा बीजेपी के शीर्ष नेताओं के चुनावी दौरों से जाहिर है कि मोदी और शाह ने कभी भी ममता को हल्के में नहीं लिया।
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ममता बनर्जी ने बीजेपी के मंसूबे पर फेरा पानी
मोदी की लोकप्रियता शिखर पर रहते हुए भी 2014 के लोकसभा चुनाव, 2016 के विधानसभा चुनाव, 2019 के लोकसभा चुनाव, 2021 के विधानसभा चुनाव व 2024 के लोकसभा चुनाव इस तरह कुल 5 अवसरों पर ममता बनर्जी ने बंगाल को जीतने का बीजेपी का मनसूबा विफल कर दिया। बीजेपी ने अपना गणित लगा लिया कि यदि वह 10 प्रतिशत वोट ज्यादा हासिल कर ले तो टीएमसी का वर्चस्व खत्म किया जा सकता है। 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 59 सीटें जीती थीं। अमित शाह ने दावा किया है कि इस बार बीजेपी 110 सीटें जीतकर दिखाएगी।
यदि बीजेपी ने चुनाव जीता तो वहां 4 नेताओं के बीच मुख्यमंत्री बनने की होड़ रहेगी। इनमें विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी, पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष, वर्तमान प्रदेशाध्याक्ष समिक भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांता मजुमदार का समावेश है। यदि बीजेपी ने 116 सीटें जीत लीं तो टीएमसी विधायकों को फोड़कर सत्ता स्थापित करने की योजना पर अमल किया जाएगा। उन विधायकों पर पहले ही ईडी, सीबीआई व आयकर विभाग की नजर है। इसलिए वह बीजेपी के दबाव में आ जाएंगे।
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माना जा रहा है 15 वर्ष तक शासन कर चुकी टीएमसी के खिलाफ इस बार बदलाव का (एंटी इन्कमबेंसी) वोट पड़ सकता है। मतदान का प्रतिशत बहुत अधिक होना क्या बीजेपी के लिए अनुकूल होगा? ममता बनर्जी ने चुनाव में बंगाल की अस्मिता, जीवनशैली और खानपान का मुद्दा उठाया। बंगाल के जो लोग अन्य राज्यों में नौकरी कर रहे थे वह भी वोट डालने के लिए लौट आए। यदि टीएमसी ने फिर जीत हासिल की तो राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली नेता के रूप में ममता बनर्जी सामने आ सकती हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
