नवभारत संपादकीय: आखिर कब तक चलेगा अमेरिका-ईरान युद्ध ? होर्मुज संकट से तेल 20% महंगा
US Iran Conflict: अमेरिका-ईरान संघर्षविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य पर टकराव से तेल की कीमतों में दो सप्ताह में 20% तक उछाल दर्ज किया गया।
- Written By: अंकिता पटेल
अमेरिका ईरान संघर्ष, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
US Iran Conflict Hormuz Strait: अमेरिका और ईरान दोनों पर युद्धोन्माद सवार है। गत 14 जून को दोनों देशों ने 60 दिनों का संघर्षविराम मान्य किया था ताकि व्यापक समझौते पर चर्चा हो सके, लेकिन देखते ही देखते इस संघर्षविराम की धज्जियां उड़ गई।
अमेरिका ने लगातार जोरदार हमले शुरू किए तो ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों व व्यावसायिक तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इस दौरान तेल की कीमतें इस माह के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गईं। 2 सप्ताह में 20 प्रतिशत भाव बढ़े। ईरान ने फिर होर्मुज की खाड़ी बंद कर दी और अमेरिका ने फिर नाकेबंदी बहाल कर दी।
ईरानी हमले में भारतीय नाविक की मौत, भारत का कड़ा विरोध
सबसे बुरी बात यह है कि ईरान ने अपने क्रूज से मिसाइलों होमुंज में यूएई के 2 तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिससे 1 भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई तथा 8 भारतीय व 2 यूक्रेनी घायल हो गए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को बुलाकर हमलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
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उन दोनों जहाजों के 46 क्रू सदस्यों में 30 भारतीय नाविक हैं। इस संघर्ष में अब तक 14 भारतीयों की मौत हुई है। ऐसी संभावना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष जबरदस्त आक्रामकता के साथ पूर्ण युद्ध में बदल सकता है। वैसे यह बात भी सामने आई है कि अमेरिका और ईरान दोनों के पास मिसाइलों का टोटा पड़ता जा रहा है।
ईरान की मिसाइल ताकत को बड़ा झटका
इसलिए वह युद्ध को अधिक लंबे समय तक खींच नहीं पाएंगे। गत माह लगाए गए अनुमान के अनुसार ईरान अपने एक तिहाई से लेकर आधे तक मिसाइल खो चुका है। उसके आधे मिसाइल लॉन्चर भी नष्ट हो चुके हैं। कई वर्षों से दावा किया जा रहा था कि ईरान के पास विभिन्न दूरी तक प्रहार करने वाले 3,000 से अधिक मिसाइल मौजूद हैं।
2024 से 2026 के बीच ईरान ने 2,200 से 2,400 मिसाइल दागे। इससे लगता है कि उसने और मिसाइल छिपा रखे होंगे। ईरान की मिसाइल बनाने की औद्योगिक क्षमता को अमेरिका ने काफी हद तक तहस-नहस कर दिया है। इनकी क्षतिपूर्ति करना आसान नहीं है।
मिसाइल संकट के बीच ड्रोन बनेंगे नया हथियार
15 टोमाहॉक व 20 पैट्रियाट मिसाइल बनाने में 1 महीने का समय लगता है। इस वर्ष नए थाड मिसाइल बनाने की कोई योजना नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने जून में प्रतिरक्षा उत्पादन कानून लागू किया ताकि मिसाइल निर्माण में तेजी लाई जा सके, लेकिन यह काम जल्दबाजी में नहीं हो सकता।
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जापान को भी अपनी पैट्रियाट मिसाइल फैक्टरी बनाने में 3 वर्ष का समय लगा था। ताइवान में चीन की चुनौती देखते हुए वहां भी अमेरिका को सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है। ऐसी स्थिति में यदि मिसाइल कम पड़ते हैं तो ड्रोन से काम चलाना होगा। रूस और यूक्रेन की 4 वर्ष से जारी लड़ाई में ज्यादातर ड्रोन ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
