(डिजाइन फोटो)
पड़ोसी ने हमसे कहा, “निशानेबाज, केंद्र की एनडीए सरकार के बजट में ‘नानी’ की याद आ गई। इससे हमें एक फिल्मी बालगीत याद आ गया नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए, बाकी जो बचा था काले चोर ले गए ! बच्चे गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाकर मौज-मजा करते हैं। नानी की कहानी बच्चे बड़े चाव से सुनते हैं। छोटी- मोटी बीमारी में नानी- दादी के नुस्खे ही काम आते हैं। पेट में मरोड़ है तो नानी कहती है- सौंफ-शक्कर खा लो। सूजन आ गई है तो हल्दी चूना लगा लो। नानी ने दुनिया बदलते देखी है। नानी का घर ननिहाल कहलाता है। नानी के बाल धूप में नहीं बल्कि उम्र के साथ सफेद होते हैं। किसी से झगड़ा होता है तो लोग धमकी देते हैं- क्या समझ रखा है, नानी याद दिला देंगे।”
हमने कहा, “जब बजट की बात हो रही है तो ‘नानी’ शब्द का गूढ़ अर्थ समझिए। ‘ना’ से नायडू और ‘नी’ से नीतीश ! आंध्रप्रदेश और बिहार के इन नेताओं ने मोदी सरकार को काफी हद तक झुका लिया। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की बैसाखी के सहारे मोदी सरकार टिकी हुई है। इसलिए उनकी मांगों को मानकर उन्हें संतुष्ट करना जरूरी था। वक्त पड़ा बांका तो किसी को भी काका कहना पड़ता है। विशेष राज्य का दर्जा इसलिए नहीं दिया जा सकता था क्योंकि ये दोनों ही पहाड़ी राज्य नहीं है। इनकी विदेश से सीमा नहीं लगती इसलिए खजाना खोलकर उन्हें स्पेशल इकोनामिक पैकेज दिया गया। आंध्र प्रदेश को 15,000 करोड़ रुपए का विशेष आर्थिक पैकेज दिया गया ताकि नायडू अपनी राजधानी अमरावती का विकास कर सकें। बिहार के लिए तो बहार आ गई। उसे सड़क- राजमार्ग, गंगा पर पुल बनाने के लिए एक साथ 26,000 करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई। बाढ़ रोकने की कार्ययोजना के लिए 11,500 करोड़ रुपए भी आवंटित किए गए। बिहार में महाबोधि कोरिडोर और सप्तर्षि कोरिडोर भी बनाया जाएगा। इस तरह बिहार को आंध्र प्रदेश से चौगुना पैसा मिलेगा। मोदी ने नीतीश से दोस्ती निभाई है।”
पड़ोसी ने कहा, “निशानेबाज, बीजेपी की लोकसभा में सिर्फ 240 सीटें हैं जबकि बहुमत के लिए 272 सीटें होनी चाहिए। इसलिए मोदी सरकार नायडू और नीतीश के सहयोग पर निर्भर है। बीजेपी का साथ देने से दोनों पार्टियां की बल्ले-बल्ले हो गई है।”