एक देश में 2 तरह के कानून कैसे, विरोध प्रदर्शन का मामला
महाराष्ट्र में बदलापुर की दुर्देवी घटना को लेकर विपक्ष को विरोध प्रदर्शन आंदोलन करने से अदालत ने रोक दिया। कानून-व्यवस्था को देखते हुए निर्देश दिया गया लेकिन इसके विपरीत बंगाल में वहां की नबन्ना अभियान आंदोलन पर कोई रोक नहीं लगाई गई। यह कैसी स्थिति है? क्या एक देश में 2 कानून हैं?
- Written By: किर्तेश ढोबले
(डिजाइन फोटो)
महाराष्ट्र में बदलापुर की दुर्देवी घटना को लेकर विपक्ष को विरोध प्रदर्शन आंदोलन करने से अदालत ने रोक दिया। कानून-व्यवस्था को देखते हुए निर्देश दिया गया लेकिन इसके विपरीत बंगाल में वहां की नबन्ना अभियान आंदोलन पर कोई रोक नहीं लगाई गई जिसमें बीजेपी का हाथ बताया जाता है। यह कैसी स्थिति है? क्या एक देश में 2 कानून हैं? नबन्ना बंगाल सरकार का सचिवालय है जहां मुख्यमंत्री, मंत्री और उच्चाधिकारी बैठते हैं।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की ट्रेनी डॉक्टर के दुष्कर्म-हत्या केस के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ी तादाद में छात्रों ने प्रदर्शन किया। इस नबन्ना अभियान आंदोलन में किसी पार्टी का झंडा नहीं था। प्रशासन को अनुमान था कि प्रदर्शन बहुत व्यापक होने वाला है इसलिए 6,000 से अधिक पुलिस कर्मियों का भारी बंदोबस्त किया गया था। प्रदर्शनकारी छात्रों पर वाटर कैनन से पानी की तेज धार और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। लाठी चार्ज भी किया गया।
प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए दंगारोधी वाहन तैनात किए गए थे। बंगाल की घटिया कानून-व्यवस्था और महिला अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन में छात्रों ने भारी एकजुटता दिखाई। रवींद्र भारती विश्वविद्यालय और कल्याणी विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं ने आंदोलन का नेतृत्व किया। बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने छात्र आंदोलनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर ममता सरकार की कड़ी आलोचना की।
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उन्होंने कहा कि किसी लोकतांत्रिक सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती थी कि वह कोलकाता की सड़कों पर इतनी बुरी तरह छात्रों पर पुलिस से अत्याचार करवाए। ये छात्र ट्रेनी डाक्टर के रेप-मर्डर मामले में न्याय की मांग कर रहे थे। उनके पास राष्ट्र का प्रतीक तिरंगा झंडा था। पुलिस ने जुल्म ढाते हुए तिरंगे और राष्ट्रीय भावना का अपमान किया।
कोलकाता और हावड़ा में छात्रों को घेर कर मारा-पीटा गया। इस खूनी खेल को रोका जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने नबन्ना सेक्रेटेरिएट जानेवाले मार्ग पर कार्गो कंटेनर लाकर खड़ा कर दिया था। बंगाल के जूनियर डाक्टर फोरम एक बड़ी रैली का आयोजन करने जा रहा था जिसके एक दिन पूर्व ही छात्रों ने यह बड़ा आंदोलन कर डाला। छात्रों पर पुलिस अत्याचार के विरोध में बीजेपी ने बुधवार को 12 घंटे का बंद रखा जिसका व्यापक असर देखा गया। पुलिस की ओर से कहा गया कि लगभग 3 घंटे तक छात्रों ने कानून अपने हाथ में ले रखा था। जब बार-बार अपील करने पर भी छात्र नहीं माने तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। जिस तरह का माहौल चल रहा है, उससे ममता सरकार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा
