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Trump Netanyahu Iran Conflict: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, युद्ध मैदान में बाद में लड़ा जाता है लेकिन पहले वह इंसान के दिमाग में उपजता है। दुनिया में अनेक युद्ध रुकवाने और नोबल शांति पुरस्कार के लिए दावेदारी करनेवाले अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप सबसे बड़े युद्ध पिपासु बन गए हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें ईरान पर हमला करने के लिए उकसाया और पटाया। अपने दिमाग का इस्तेमाल किए बिना ही ट्रंप ने इस युद्ध में अमेरिका को झोंक दिया। इससे उनके मित्र अरब देश मुसीबत में फंस गए जहां अमेरिका के सैनिक अड्डे हैं। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। उनके परिवार भी चिंतित हैं। तेल और गैस का संकट आ गया। यह सब ट्रंप के शैतानी दिमाग की वजह से है।’
हमने कहा, ‘जहां तक दिमाग, मस्तिष्क या ब्रेन की बात है, उसमें 100 अरब न्यूरॉन्स रहते हैं। दिमाग में प्रतिदिन 50,000 से 70,000 तक विचार आते हैं। दिमाग में सूचना की गति 268 मील प्रतिघंटा की स्पीड से दौड़ती है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, खाली दिमाग शैतान का घर रहता है। जब शैतान सक्रिय हो जाता है तो हमले करवाता है जिसमें मासूम बच्चे भी बड़ी तादाद में मारे जाते हैं। निर्माण विनाश में बदल जाता है। उल्टी खोपड़ी के नेता न खुद शांति से रहते हैं, न दूसरे को शांति से रहने देते हैं। अमेरिका पहले भी अपनी सीमा से बहुत दूर कोरिया, वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में युद्ध करता रहा है। जापान में एटमबम उसी ने गिराए थे। लड़ाई छेड़े बिना उसे खाना हजम नहीं होता। भारत में शांतिलाल नाम के लोग मिल जाएंगे लेकिन अमेरिका में कोई पौसफुल या पीस लवर नामक आदमी नहीं मिलेगा।”
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हमने कहा, ‘इंसानियत, दया, करुणा, सहानुभूति की भावनाएं मानव मस्तिष्क में उपजती हैं। भगवान महावीर, गौतम बुद्ध, महात्मा गांधी हमारे देश में हुए, नेहरू भी विश्व शांति के समर्थक थे। अमेरिकी राष्ट्रपति कोई भी हो, वह दुनिया में अपना दबदबा या वर्चस्व चाहता है। इतनी सभ्यता विकसित होने के बाद भी वह आदिमानव के समान हिंसा करता है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, युद्ध की खबरें लोग दिलचस्पी से पढ़ते हैं। संस्कृत में कहा गया है युद्धस्य वार्ता रम्या। महाभारत भी तो कौरव पांडव के विनाशकारी युद्ध की गाथा है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा