डोनाल्ड ट्रंप ( सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि मुझे खुश करना महत्वपूर्ण है। यदि भारत मुझे खुश नहीं करता तो मैं और टैरिफ लगा दूंगा। मोदी एक अच्छे इंसान हैं। वे जानते हैं कि मैं अप्रसन्न हूं इसलिए मुझे खुश करना जरूरी है।’ हमने कहा, ‘आश्चर्य की बात है कि दुनिया की एकमात्र महाशक्ति अमेरिका का प्रेसीडेंट भी खुश नहीं है।
ट्रंप को फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ का वीडियो भेजा जाए जिसमें उनके ही समान महासनकी व बेरहम पात्र की भूमिका अमरीश पुरी ने निभाई थी। उसका डायलॉग मशहूर हुआ था- मोगैंबो खुश हुआ!’ पड़ोसी ने कहा,’निशानेबाज, ट्रंप की इच्छाएं अनंत हैं। भगवान बुद्ध ने कहा था कि दुखों का मूल कारण इच्छा है। जब इच्छा पूरी नहीं होती तो दुख होता है और क्रोध आता है। दुनिया को जीतने निकले सिकंदर को भी खाली हाथ लौटना पड़ा था। ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को किडनैप कर लिया ताकि वहां के तेल पर कब्जा कर सकें। इसके बाद वह दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों खासकर कोलंबिया को निशाना बना सकते हैं। डेनमार्क के स्वामित्व वाला ग्रीनलैंड हड़पने की भी उनकी इच्छा है।
यह सारी अशांतिपूर्ण हरकतें वह शांति का नोबल प्राइज पाने के लिए कर रहे हैं। यदि मोदी उनके लिए नोबल प्राइज की सिफारिश कर दें तो ट्रंप खुश हो जाएंगे।’ हमने कहा, ‘ऐसा नहीं हो सकता। ट्रंप को खुश होने की इतनी ही इच्छा है तो अपने यहां किसी विदूषक, मसखरे या कोर्ट जेस्टर को रख लें जो उन्हें चुटकुले सुनाता रहे। पुराने राजा-महाराजा अपने दरबार में विदूषक रखा करते थे। अकबर-बीरबल के चुटकुले या जोक्स मशहूर रहे हैं।’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, ट्रंप को खुश करने के लिए कॉमेडी फिल्में दिखाई जा सकती हैं। जॉनी लीवर या सुदेश भोसले की मिमिक्री सुनाई जा सकती है। वह चाहें तो कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में तशरीफ ला सकते हैं। अपने किसी सहायक से कह सकते हैं कि मुझे गुदगुदी करो ताकि मैं हंसने लगूं।’ हमने कहा, ‘स्वार्थी, महत्वाकांक्षी लोग हमेशा अंदर से अनहैपी रहते हैं। ट्रंप का भी कोई इलाज नहीं है। 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव तक दुनिया को उन्हें झेलना होगा।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा