ट्रंप की 500 प्रतिशत टैरिफ (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: खुद को दुनिया का दरोगा समझने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल आयात करने वाले देशों की वस्तुओं व सेवा पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की ठान ली है।उनके सैंक्शनिंग रशिया 2025 विधेयक का सबसे जोरदार झटका भारत, चीन व ब्राजील को लगने वाला है।अमेरिका का आरोप है कि जो भी देश रूस से क्रूड ऑयल खरीदते हैं वह यूक्रेन पर हमले के लिए रूस को वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं।इसी ताकत के बल पर पुतिन हमला जारी रखे हुए हैं।रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का ट्रंप का शांति प्रस्ताव पुतिन ने ठुकरा दिया है।
दुनिया के सारे युद्ध खत्म कराने का श्रेय लेकर ट्रंप शांति का नोबल पुरस्कार हासिल करने के लिए बेचैन हैं।उनकी सारी खटपट इसी के लिए है।रूस की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल व प्राकृतिक गैस के निर्यात पर निर्भर है। अमेरिका मानता है कि तेल के निर्यात से रूस को लड़ाई के लिए बल मिलता है।इसलिए रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया जा रहा है।गत 3 वर्षों में रूस से सस्ता तेल खरीदने वाले भारता ने उससे तेल का आयात कमा कर दिया है।इससे भारत की विदेशी मुद्रा बची थी।ट्रंप ने पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था, अब यदि 500 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया, तो भारत के 85 अरब डॉलर के निर्यात को जोरदार धक्का लगेगा।
खास तौर पर औषधियों, कपड़े, आभूषण, वाहनों के स्पेयर पार्ट, सूचना तकनीक पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।रुपया और भी नीचे चला जाएगा।अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद किया, तो देश में पेट्रोल, डीजल, गैस के दाम बहुत बढ़ जाएंगे।ट्रंप यह नहीं सोच रहे कि 500 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने से उनके देशवासियों की भी मुश्किलें बढ़ेंगी।उन्हें भारत और चीन से आने वाली वस्तुएं बहुत महंगे दाम पर खरीदनी पड़ेंगी।अमेरिका में श्रमिकों का वेतन ज्यादा होने से वहां मैन्युफैक्चरिंग बहुत महंगी पड़ती है।इस तरह टैरिफ बढ़ाने से अमेरिका के नागरिकों का भी गुस्सा भड़केगा।टैरिफ में मनमानी वृद्धि को कनिष्ठ न्यायालय ठुकरा चुका है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद स्पष्ट होगा कि क्या ट्रंप को ऐसा करने का अधिकार है? यदि निर्णय खिलाफ में गया तो ट्रंप अमेरिकी कांग्रेस में बिल पास कराने का प्रयत्न करेंगे, भारत-अमेरिका व्यापार करार भी अब तक आकार नहीं ले पाया है।भारत ने अब तक ट्रंप के कदमों पर नरम भूमिका अपनाई है, जबकि विपक्ष का सरकार पर दबाव है कि ट्रंप के सामने झुका न जाए।मोदी सरकार को आर्थिक व राजनीतिक पहलुओं पर विचार कर उपयुक्त निर्णय लेना होगा।यदि ट्रंप का रवैया नहीं सुधरता तो ब्रिक्स देश आपस में व्यापार समझौता करें और यूरोप के देशों से भी इस प्रकार के व्यापार अनुबंध करें।
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा