सांकेतिक फोटो (AI जनरेटेड एंड मोडिफाइड)
Tariff Trouble for Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने उनके द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि राष्ट्रपति के पास आर्थिक आपातकाल घोषित कर मनमाने ढंग से आयात पर भारी टैक्स लगाने की शक्ति नहीं है। यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे पर सीधा प्रहार है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बहुमत से आया है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कड़े शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अधिकारों की सारी सीमाएं लांघ दी हैं, इसीलिए इस टैरिफ को खत्म किया जा रहा है। ट्रंप ने कांग्रेस की मंजूरी के बिना ही 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स ऐक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल कर दुनिया भर पर टैरिफ बम फोड़ दिया था, जिसे अब अवैध करार दे दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप खासे निराश हैं। उन्होंने अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले एक साल में टैरिफ के जरिए जो अरबों डॉलर वसूले गए उस पैसे का अब क्या होगा? ट्रंप का कहना है कि अदालत ने इस बारे में एक लाइन तक नहीं लिखी कि पैसा सरकार के पास रखा जाएगा या वापस किया जाएगा। उन्होंने इस फैसले को खराब बताते हुए कहा कि यह ऐसा है जैसे इसे समझदार लोगों ने न लिखा हो। ट्रंप ने आशंका जताई कि अब यह मामला अगले दो साल तक मुकदमों में फंसा रहेगा।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी अर्थशास्त्रियों के अनुसार, करीब 175 अरब डॉलर की राशि रिफंड दावों के दायरे में आ सकती है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि यदि रिफंड देना पड़ा तो ट्रेजरी विभाग इसके लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है।
इस बीच कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजॉम ने मांग की है कि अवैध करार दिए गए टैरिफ की वसूली गई रकम तुरंत सभी अमेरिकियों को लौटाई जाए। अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि इन बढ़े हुए टैरिफ का सबसे ज्यादा बोझ विदेशी एक्सपोर्टर्स पर नहीं, बल्कि उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ा है जो विदेशों से माल मंगाती हैं। ऐसे में वे कंपनियां अपना एक्स्ट्रा टैरिफ वापस मांगने के लिए लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के तुरंत बाद ही ट्रंप ने अपना नया पैंतरा चल दिया है। उन्होंने हार न मानते हुए घोषणा की कि वह संघीय कानून के सेक्शन 122 के तहत एक नया एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन करेंगे, जिसके जरिए 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि हम अदालत में 5 साल तक फंसे रह सकते हैं, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे घटनाक्रम का भारत पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका भारत से कितना टैरिफ लेगा? रूस से तेल खरीदने के चलते अमेरिका ने पहले भारत पर 50 फीसदी का भारी-भरकम टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह 18 फीसदी का टैरिफ खत्म हो गया है।
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ट्रंप के नए ऐलान के मुताबिक, अब भारत पर 24 फरवरी से अमेरिका में आयातित वस्तुओं पर 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाया जाएगा। व्हाइट हाउस ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बयान जारी किया है कि भारत समेत अमेरिका के जिन ट्रेडिंग पार्टनर्स ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले ट्रंप प्रशासन के साथ टैरिफ डील की थी, उन सभी पर केवल 10 प्रतिशत टैरिफ ही लगेगा। हालांकि, जो टैरिफ सेक्शन 232 और सेक्शन 301 के तहत लगाए गए थे वे पहले की तरह कायम रहेंगे।